
Delhi pollution: दिल्ली का प्रदूषण दिल पर भारी, शिमला की ठंड बेअसर: स्टडी में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ सांस की बीमारियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दिल की गंभीर बीमारियों का भी बड़ा कारण बनता जा रहा है। एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि राजधानी दिल्ली में जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है, वैसे-वैसे हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसे मामलों में तेज़ी से इजाफा होता है। इसके विपरीत ठंडे पहाड़ी शहर शिमला में प्रदूषण और दिल की बीमारियों के बीच कोई ठोस और सीधा संबंध सामने नहीं आया है।
यह अध्ययन ‘पायलट सर्विलांस ऑफ एनवायरमेंट रिस्क एंड कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स इन दिल्ली एंड शिमला, इंडिया 2021’ नाम से प्रतिष्ठित जर्नल डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च में यह स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI और हवा में मौजूद पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों का स्तर बढ़ते ही दिल से जुड़ी आपातकालीन बीमारियों के मामलों में लगभग तुरंत असर दिखाई देता है।
स्टडी के अनुसार, दिल्ली में AQI, पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में हर 10 यूनिट की वृद्धि पर दिल के मरीजों की अस्पताल में भर्ती संख्या क्रमशः लगभग 1.8 प्रतिशत, 1.2 प्रतिशत और 2 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रदूषण बढ़ने के महज एक दिन के भीतर ही हार्ट अटैक और अन्य कार्डियक इमरजेंसी के मामलों में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई।
यह अध्ययन जनवरी से जुलाई 2021 के बीच किया गया, जिसमें दिल्ली और शिमला के अस्पतालों में भर्ती 41 हजार से अधिक मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें दिल्ली के 11 हजार से ज्यादा और शिमला के करीब 3,900 मरीज दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित पाए गए। हालांकि शिमला में कुछ समय के लिए प्रदूषण का स्तर बढ़ा, लेकिन वहां दिल की बीमारियों और खराब हवा के बीच कोई मजबूत वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं हो सका।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि दोनों शहरों के मरीजों की जीवनशैली में बड़ा अंतर है। दिल्ली में कम शारीरिक गतिविधि, अधिक मानसिक तनाव, हाई ब्लड प्रेशर और अस्वास्थ्यकर खानपान आम पाया गया, जो दिल की बीमारियों के जोखिम को और बढ़ाता है। वहीं शिमला में तंबाकू सेवन और ठोस ईंधन से खाना पकाने की प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद वहां प्रदूषण का सीधा असर दिल की बीमारियों पर स्पष्ट रूप से नहीं दिखा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन भारत में प्रदूषण से जुड़ी स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को और व्यापक बनाने की जरूरत को रेखांकित करता है। अब समय आ गया है कि वायु प्रदूषण को केवल फेफड़ों की समस्या न मानकर दिल की बीमारियों के एक बड़े खतरे के रूप में भी देखा जाए, क्योंकि खराब हवा दिल के लिए भी उतनी ही घातक साबित हो सकती है।





