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वकील बिना रह सकते हैं डॉक्टर बिना नहीं : मुख्य न्यायाधीश

- चिकित्सकीय परामर्श के दौरान स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए डॉक्टरों का नजरिया
- चिकित्सकीय परामर्श के दौरान स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए डॉक्टरों का नजरिया

नई दिल्ली, 3 मई (टॉप स्टोरी न्यूज़ नेटवर्क): आजादी के बाद देश में मेडिकल एजुकेशन के लिए स्थापित एम्स दिल्ली अपने उद्देश्यों पर पूरी तरह से खरा उतरा है। यहां गरीबों के लिए इलाज से लेकर गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा शिक्षा तक की सुविधाएं मौजूद हैं। भारत में कुछ ही ऐसे संस्थान हैं, जिनका व्यावसायीकरण नहीं हुआ है और एम्स उनमें से एक है। इसकी प्रतिष्ठा काफी ज्यादा है। यह बातें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डॉ धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने वीरवार को एम्स दिल्ली के जेएलएन ऑडिटोरियम में आयोजित आरडीए -कांफ्रेंस कार्यक्रम में कहीं।

इस दौरान सीजेआई ने कहा कि हमारे देश में एक कहावत है कि हर घर में एक डॉक्टर और वकील तो होना ही चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि बिना वकील के तो आप रह सकते हैं लेकिन बिना डॉक्टर के नहीं रह सकते। उन्होंने कहा, देश में कई जगह एम्स जैसे अस्पताल खोले जा रहे हैं। ऐसे में एम्स की संख्या बढ़ाने के साथ उन्हें बेहतर बनाया जाना भी बहुत जरुरी है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि डॉक्टर और वकील का पेशा लगभग एक जैसा है। दोनों ही फील्ड में समर्पण की जरूरत होती है। कई मामले ऐसे होते हैं, जिनमें कोर्ट को मेडिकल बोर्ड की सहायता चाहिए होती है। चाहे 24 हफ्ते के पहले गर्भावस्था का मामला हो या एलजीबीटीक्यू का मामला हो, हर जगह न्याय करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श की जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टरों का नजरिया स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, क्योंकि काफी कुछ उनकी रिपोर्ट पर निर्भर करता है। इस अवसर पर एम्स निदेशक डॉ एम श्रीनिवास, अतिरिक्त निदेशक करण सिंह, आरपी सेंटर के अध्यक्ष डॉ जेएस तितियाल और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ विनय कुमार मौजूद रहे।

जीवन में कुछ सबसे बड़े सबक डॉक्टरों से सीखे : जस्टिस चंद्रचूड़
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने जीवन में कुछ सबसे बड़े सबक डॉक्टरों से सीखे हैं। उन्होंने साल 1998 में गोवा जाते समय एक गंभीर दुर्घटना को याद करते हुए बताया कि मुझे हवाई मार्ग से मुंबई लाया गया और वहां अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में डॉ. एनएन श्रीखंडे के साथ पूरी शाम बिताने का मौका मिला। वह एक अप्रत्याशित विशेषज्ञ थे और छुट्टियों के दौरान अपने दौरे पर थे। डॉ. श्रीखंडे ने अपनी विशेषज्ञता में न होने के बावजूद मेरे शरीर (न्यायमूर्ति चंद्रचूड़) के विभिन्न हिस्सों से कांच के टुकड़े निकालने में घंटों समर्पित किए। इस दौरान उन्होंने एनेस्थीसिया भी नहीं दिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, डॉ श्रीखंडे ने असाधारण व्यवहार का प्रदर्शन करते हुए मुझे साहित्य, संगीत और फिल्मों से संबंधित बातचीत में लगाए रखा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि डॉ. श्रीखंडे के साथ बातचीत ने मुझ पर एक अमिट छाप छोड़ी, जिससे मुझे जीवन के बारे में अमूल्य सबक मिले और मैं अदालत कक्ष और उसके बाहर बातचीत के प्रति अपने दृष्टिकोण में बदलाव ला सका। इस सकारात्मक प्रभाव के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं।

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संवाददाता

Manisha Jha

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