UPI MDR Protest: नोएडा में कांग्रेस ने निकाला विरोध मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
नोएडा। यूपीआई के चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के विरोध में गौतमबुद्ध नगर जिला कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को नोएडा में प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जनजागरण मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। नोएडा में हुए इस प्रदर्शन की स्थानीय रिपोर्ट भी सामने आई है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के नए यूपीआई ढांचे का विरोध करते हुए इसे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला बताया। जिला अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी और जेवर समेत पूरे जिले में बड़ी संख्या में छोटे और बड़े व्यापारी डिजिटल भुगतान पर निर्भर हैं। ऐसे में भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने का असर सीमित मार्जिन पर कारोबार करने वाले व्यापारियों पर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक ₹2,000 से अधिक के निर्धारित पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ऐसे लेन-देन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रहेगा। सरकार ने कहा है कि ग्राहकों से यह MDR नहीं लिया जाएगा और सभी पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह निशुल्क रहेंगे। छोटे व्यापारियों सहित करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन को नए MDR ढांचे से अप्रभावित रहने की बात भी सरकार ने कही है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी की ओर से इस नीति को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नए MDR ढांचे से व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत आएगी और इसका अप्रत्यक्ष असर बाजार तथा ग्राहकों पर पड़ सकता है। पार्टी की ओर से विदेशी भुगतान कंपनियों के दबाव से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं, जिन्हें सरकार ने खारिज किया है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि यूपीआई की व्यापक स्वीकार्यता की एक बड़ी वजह इसका आसान और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान माध्यम होना है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार व्यापारियों की वास्तविक लागत और छोटे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नीति पर पुनर्विचार करे और यह सुनिश्चित करे कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।
सरकार का पक्ष है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था के भीतर लगने वाला शुल्क है, जिसे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप प्रदाताओं समेत संबंधित भागीदारों के बीच बांटा जाएगा। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य यूपीआई व्यवस्था को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।
प्रदर्शन में गौतम अवाना, मुकेश शर्मा, महाराज सिंह नागर, अशोक पंडित, मोहम्मद तकी, धर्मबीर प्रधान, निशा शर्मा, किशन शर्मा, केके भाटी एडवोकेट, रमेश यादव, रघुराज शर्मा, रूबी चौहान, नरेश शर्मा, सुरेंद्र प्रताप सिंह, अरुण गुर्जर, मोहित भाटी एडवोकेट, नितीश चौधरी, अरविंद रेक्सवाल, सुबोध भट्ट, सचिन शर्मा, विपिन त्यागी, तनवीर अहमद, नीरज शर्मा, गजन प्रधान, ओमकार राणा, मेहरचंद वाल्मीकि, दुर्गेश एडवोकेट, अनीस, उपेंद्र, सुनील भाटी, ऋतिक सिंह, मनोज चौधरी, योगेश मिश्रा, गिरीश शर्मा, रवि भाटी, अरविंद कुमार, अनुज भाटी और नितिन कुमार समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
नए यूपीआई MDR ढांचे को 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है। इसके तहत व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान निशुल्क बने रहेंगे, जबकि निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतान पर MDR लागू होगा।


