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Noida: तय समय पर प्लॉट नहीं देने पर बिल्डर को झटका, ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश

Noida: तय समय पर प्लॉट नहीं देने पर बिल्डर को झटका, ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश

नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि बिल्डर या डेवलपर खरीदार को एग्रीमेंट के अनुसार तय समय पर प्लॉट उपलब्ध नहीं कराता है, तो उसे जमा की गई पूरी राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी। इसी मामले में आयोग ने फ्यूचर फ्री होम्स प्राइवेट लिमिटेड को खरीदार की जमा धनराशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 30 दिनों के भीतर लौटाने का आदेश दिया है।

यह मामला गाजियाबाद के मोदीनगर स्थित गोविंदपुरी निवासी आशीष त्यागी द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार उन्होंने फ्यूचर फ्री होम्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से टप्पल क्षेत्र के ग्राम सिमरोठी में 100 वर्ग मीटर का एक आवासीय प्लॉट बुक कराया था। प्लॉट की कुल कीमत 5.30 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें से 4.55 लाख रुपये का भुगतान 60 महीनों की किश्तों में किया जाना था।

आशीष त्यागी ने निर्धारित योजना के तहत करीब 2.30 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। एग्रीमेंट में यह भी तय था कि कुल राशि का आधा भुगतान होने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी। जब खरीदार ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी तो कंपनी की ओर से बताया गया कि संबंधित प्लॉट एससी और एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। इसके बाद कंपनी ने किसी अन्य स्थान पर प्लॉट देने की बात कही, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त तीन लाख रुपये जमा कराने की मांग भी रखी गई।

खरीदार ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए अपनी जमा राशि वापस मांगी, लेकिन कंपनी की ओर से पैसा वापस नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की।

मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने की। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते आयोग ने एकपक्षीय सुनवाई की।

सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने माना कि कंपनी ने समय पर प्लॉट उपलब्ध नहीं कराया और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार किया। आयोग ने आदेश दिया कि फ्यूचर फ्री होम्स प्राइवेट लिमिटेड खरीदार को जमा की गई 2.30 लाख रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर लौटाए।

यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश करने के बाद समय पर प्लॉट या संपत्ति नहीं मिलने की समस्या का सामना करते हैं।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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