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Noida: Noida International Airport के पास बन रहा पशु बचाव एवं पुनर्वासन केंद्र, अगले माह तक होगा तैयार

Noida: Noida International Airport के पास बन रहा पशु बचाव एवं पुनर्वासन केंद्र, अगले माह तक होगा तैयार

उत्तर प्रदेश के Noida में विकसित हो रहे Noida International Airport के आसपास वन्य जीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थायी पशु बचाव और पुनर्वासन केंद्र का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। अधिकारियों के अनुसार यह केंद्र मार्च के अंत या अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक बनकर तैयार हो जाएगा और इसके बाद यहां वन्य जीवों के रखरखाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

यह केंद्र यमुना सिटी के सेक्टर-17 में राजपुर गांव के पास विकसित किया जा रहा है। परियोजना को Zoo Authority of India की मंजूरी मिलने के बाद जुलाई 2025 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। कुल 10 हेक्टेयर भूमि में से पांच हेक्टेयर जमीन Yamuna Expressway Industrial Development Authority (यीडा) की है, जबकि शेष पांच हेक्टेयर वन विभाग के अधीन है।

प्राधिकरण अपनी भूमि पर पक्का निर्माण करा रहा है, जहां वन्य जीवों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसमें पशुओं के उपचार के लिए मेडिकल सेंटर, कई कमरे, शेड और अन्य बुनियादी ढांचे शामिल हैं। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र के संचालन के लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम भी तैनात की जाएगी, जिससे घायल या बचाए गए वन्य जीवों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।

वन विभाग की भूमि को ग्रीन श्रेणी में रखा गया है, जहां प्राकृतिक परिवेश में बाड़े और खुले क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। यहां वन्य जीवों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में रखा जाएगा। केंद्र के प्रबंधन और रेस्क्यू अभियान में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

दरअसल, देहरादून स्थित Wildlife Institute of India द्वारा जेवर क्षेत्र में एक विस्तृत अध्ययन कराया गया था। इस अध्ययन में एयरपोर्ट के 10 किलोमीटर दायरे में आने वाले वन्य जीवों की संख्या और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार जेवर क्षेत्र में 258 काले हिरण और 176 सारस पाए गए हैं। एयरपोर्ट निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्यों के कारण इनके प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए संरक्षण के लिए इस केंद्र की योजना बनाई गई।

प्रारंभ में इस परियोजना की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई थी, जिसने करीब आठ करोड़ रुपये का अनुमानित बजट तैयार किया था। बाद में यीडा ने स्वयं निर्माण कराने का निर्णय लिया और वर्तमान में यह परियोजना लगभग 3.41 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि अप्रैल 2026 तक यहां वन्य जीवों के ठहरने, उपचार और पुनर्वासन की सभी सुविधाएं पूरी तरह विकसित कर दी जाएंगी।

यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि चयनित कंपनी से निर्धारित शर्तों के आधार पर निर्माण कराया जा रहा है और अगले माह तक कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस केंद्र का उद्देश्य क्षेत्र के वन्य जीवों को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करना और एयरपोर्ट क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना है।

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