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नई दिल्ली: बिना दवा मरीजों को स्वस्थ करने वाली थेरेपी से दवा लॉबी परेशान 

नई दिल्ली: बिना दवा मरीजों को स्वस्थ करने वाली थेरेपी से दवा लॉबी परेशान 
नई दिल्ली:-फिजियोथेरेपिस्ट सेवाओं की वजह से आईएमए संग दवा लॉबी को पहुंच रहा नुकसान

नई दिल्ली, 12 सितम्बर: फिजियोथेरेपिस्ट के नाम के आगे डॉक्टर लगाने के विवाद पर भारतीय फिजियोथेरेपिस्ट संघ ने (आईएपी) आपत्ति जताते हुए इसके लिए दवा लॉबी को जिम्मेदार ठहराया है। संघ का कहना है कि फिजियोथेरेपिस्ट के नाम के आगे डॉक्टर लगाने का फैसला नेशनल कमीशन फार एलाइड एंड हेल्थ केयर प्रोफेशन ( एनसीएएचपी) का है जिसका गठन संसद द्वारा किया गया है। ऐसे में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का आपत्ति जताना समझ से परे है।

शुक्रवार को प्रेस वार्ता में आईएपी के अध्यक्ष डॉ. संजीव झा ने कहा कि नाम के आगे डॉक्टर लगाने का फैसला एनसीएएचपी का है। इस आयोग का गठन 2021 में हुआ था और यह फैसला 2023 में लिया गया है। हाल ही में डीजीएचएस की ओर से जारी आदेश में फिजियोथेरेपिस्ट को अपने नाम के आगे डॉक्टर नहीं लगाने की बात कही गई। जो गैरकानूनी थी। उन्होंने कहा कि डीजीएचएस के पास इस संबंध में कोई अधिकार नहीं है। आयोग ने जब फिजियोथेरेपिस्ट को नाम के आगे डॉक्टर लगाने का अधिकार दिया है तो आईएमए हो या फिर दूसरी संस्था उसके पास आदेश निकालने का कोई अधिकार नहीं है। इस अवसर पर महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ. रूचि वार्ष्णेय और आरएमएल अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग की प्रमुख व आईएपी दिल्ली अध्यक्ष डॉ. पूजा सेठी मौजूद रहे।

डॉ. संजीव झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री चाहते हैं कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं में विकास हो लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते कि ऐसा हो। दवा कंपनियों की लॉबी हो या फिर सर्जरी के संयंत्र बनाने वालों की लॉबी हो, ये लोग नहीं चाहते कि लोग सिर्फ एक्सरसाइज से ठीक हो जाएं। कुछ लॉबी देश को पीछे ले जाना चाहते हैं। उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के लोगों से सवाल करते हुए कहा कि देश में लाखों झोला छाप डॉक्टर घूम रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य सेवा संबंधी विभागों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे फिजियोथेरेपिस्ट से ही उन्हें आपत्ति है। जबकि हम साइंस बैकग्राउंड के साथ मानक प्रशिक्षण प्राप्त हैं।

उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से नौ सितंबर को आदेश हुआ था कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डाक्टर नहीं लगा सकते हैं। इस आदेश को 24 घंटे के अंदर स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने वापस ले लिया है। अब फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे डॉक्टर लगा सकते हैं। नेशनल कमीशन फार एलाइड एंड हेल्थ केयर प्रोफेशन ने इसकी पुष्टि कर दी है।

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