Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Mathura : वृंदावन में धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में उतरा संत समाज, बोला संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तानChandigarh : चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के लिए भाजपा ईडी , सीबीआई, इनकम टैक्स और इलेक्शन कमीशन का दुरुपयोग कर रही है- हरपाल सिंह चीमाBulandshahr : खुर्जा के डाबर गांव में नकली पनीर की फैक्ट्री पर छापा, 10 क्विंटल माल सीजChandigarh : मेरे घर या अस्पताल से एक भी पैसा बरामद नहीं हुआ; 42 घंटे की रेड के बाद ईडी खाली हाथ लौटी- डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ाCensus 2027 Self Enumeration: जनगणना के दूसरे चरण की तैयारियां शुरू, डीएम मेधा रूपम ने दिए जागरूकता अभियान के निर्देशNoida Festive Security: त्योहारों पर पुलिस अधिकारियों ने की पैदल गश्त, ज्वैलर्स की दुकानों के सीसीटीवी कैमरे जांचेNoida GRAP Violation: ग्रैप प्रतिबंधों के बावजूद सेक्टर-113 में निर्माण कार्य जारी, बिल्डर पर 25 लाख जुर्माने की संस्तुतिGreater Noida Vending Zone: 85 वेंडरों को मिले प्लेटफॉर्म, अब सड़क किनारे नहीं लगानी पड़ेगी रेहड़ी

ICMR: आईसीएमआर ने उद्योगों को सौंपी तीन स्वदेशी तकनीकें, कैंसर और संक्रामक रोगों के इलाज को मिलेगी नई रफ्तार

ICMR: आईसीएमआर ने उद्योगों को सौंपी तीन स्वदेशी तकनीकें, कैंसर और संक्रामक रोगों के इलाज को मिलेगी नई रफ्तार

भारत में कैंसर और संक्रामक रोगों के इलाज तथा वैक्सीन विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी ‘मेडिकल इनोवेशंस पेटेंट मित्र’ पहल के तहत विकसित तीन स्वदेशी बायोमेडिकल तकनीकों का लाइसेंस प्रमुख भारतीय दवा एवं वैक्सीन कंपनियों को सौंप दिया है। इस पहल से सस्ती, सुरक्षित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

आईसीएमआर द्वारा हस्तांतरित तकनीकों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से जुड़ी सर्वाइकल प्री-कैंसर अवस्था के उपचार के लिए विकसित ‘शेता2’ दवा उम्मीदवार शामिल है। इसके अलावा टाइफाइड तथा साल्मोनेला-शिगेला संक्रमण से बचाव के लिए दो अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों का भी लाइसेंस उद्योगों को दिया गया है।

आईसीएमआर ने ‘शेता2’ तकनीक का लाइसेंस एमक्योर फार्मास्युटिकल्स को सौंपा है, जबकि टाइफाइड और साल्मोनेला-शिगेला संक्रमण के खिलाफ विकसित दोनों वैक्सीन तकनीकों का लाइसेंस बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को प्रदान किया गया है।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि यह पहल सार्वजनिक शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत सहयोग स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें तेजी से आम मरीजों तक पहुंच सकेंगी और देश में किफायती उपचार तथा स्वदेशी वैक्सीन विकास को नई गति मिलेगी।

आईसीएमआर का मानना है कि इस पहल से भारत स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत होगा तथा भविष्य में गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने की क्षमता बढ़ेगी।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें