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हरियाणा विधानसभा चुनाव: अरविंद केजरीवाल की रिहाई बीजेपी या कांग्रेस के लिए मुसीबत?

हरियाणा विधानसभा चुनाव
हरियाणा विधानसभा चुनाव: अरविंद केजरीवाल की रिहाई बीजेपी या कांग्रेस के लिए मुसीबत?

हरियाणा विधानसभा चुनाव: अरविंद केजरीवाल की रिहाई बीजेपी या कांग्रेस के लिए मुसीबत?

हरियाणा चुनाव: गौरतलब है कि राहुल गांधी के आप के साथ गठबंधन करने की उत्सुकता के बावजूद, हरियाणा के कुछ नेताओं के विरोध और सीट बंटवारे के मुद्दे पर सहमति न बनने के कारण कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकी।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, वहीं भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि ‘जेल सीएम’ अब ‘बेल सीएम’ बन गया है। केजरीवाल की रिहाई ने जहां आप कार्यकर्ताओं और नेताओं में नया जोश भर दिया है, वहीं इससे उनके प्रतिद्वंद्वियों में खलबली मच गई है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही केजरीवाल का पूरा ध्यान अब हरियाणा चुनाव पर रहेगा, जिससे अन्य राजनीतिक दलों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

गौरतलब है कि राहुल गांधी के आप के साथ गठबंधन करने की उत्सुकता के बावजूद, हरियाणा के कुछ नेताओं के विरोध और सीट बंटवारे के मुद्दे पर सहमति न होने के कारण कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकी। आप को लगा कि कांग्रेस टाल-मटोल की रणनीति अपना रही है और इसलिए उसने सभी 90 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। आप और कांग्रेस ने हाल ही में हरियाणा और दिल्ली में लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए सहमति नहीं बन पाई। अब, आप, जेजेपी, इनेलो और एएसपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के अलावा एक दावेदार है।

अधिकांश बार, मतदान के रुझानों से पता चलता है कि आप कांग्रेस पार्टी के वोट शेयर में सेंध लगाती है। आप का जन्म कांग्रेस के विरोध में हुआ था और कांग्रेस नेताओं द्वारा इसे प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है। यही एक कारण है कि कांग्रेस नेताओं ने हरियाणा में आप के लिए जगह नहीं छोड़ी। हरियाणा लोकसभा चुनाव में, दोनों पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ा था क्योंकि कांग्रेस ने 9 सीटों पर और आप ने 1 पर उम्मीदवार उतारे थे। नतीजतन, भाजपा पिछले चुनावों की तुलना में 5 सीटों पर हार गई और उसे केवल 5 सीटें मिलीं। 2019 के चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाने वाली कांग्रेस इस बार 5 सीटें जीतने में कामयाब रही। हालांकि, कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ने वाली आप को हार का सामना करना पड़ा। पिछले 5 सालों में हरियाणा में आप का वोट शेयर बढ़ा है। अगर यह ट्रेंड आगामी विधानसभा चुनाव में भी जारी रहा तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों को नुकसान हो सकता है। हालांकि, सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस पार्टी को हो सकता है। गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा की सभी 90 सीटों के लिए 5 अक्टूबर को एक ही चरण में मतदान होगा और 8 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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