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GB Pant Hospital Delhi: जीबी पंत अस्पताल में स्थायी डायरेक्टर का अभाव, सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं लिंक व्यवस्था के भरोसे

GB Pant Hospital Delhi: जीबी पंत अस्पताल में स्थायी डायरेक्टर का अभाव, सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं लिंक व्यवस्था के भरोसे

नई दिल्ली, 22 फरवरी। राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में इन दिनों सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं एक लिंक डायरेक्टर के भरोसे संचालित हो रही हैं। दिल और दिमाग की जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मशहूर इस अस्पताल में स्थायी मेडिकल डायरेक्टर का पद लंबे समय से खाली पड़ा है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

जीबी पंत अस्पताल देश के अग्रणी सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों में गिना जाता है, जहां कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में स्थायी नेतृत्व का अभाव न केवल प्रशासनिक कामकाज बल्कि अस्पताल की समग्र कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकता है।

अस्पताल के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इतने बड़े संस्थान को पूर्णकालिक प्रशासनिक नेतृत्व की आवश्यकता है। उनके अनुसार, लिंक व्यवस्था अस्थायी समाधान हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक यह व्यवस्था प्रभावी नहीं मानी जा सकती। कर्मचारियों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा है कि महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों और नई योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फुल टाइम डायरेक्टर न होने से नीतिगत निर्णय, विभागों के बीच समन्वय और संसाधनों के बेहतर उपयोग में बाधाएं आ सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई महत्वपूर्ण फाइलें और प्रस्ताव लंबित हैं, जिन पर स्थायी प्रमुख की नियुक्ति के बाद ही तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में रोजाना जटिल और संवेदनशील मामलों का इलाज होता है, जहां प्रशासनिक स्पष्टता और मजबूत नेतृत्व अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

मरीजों के परिजन और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सरकार से जल्द पूर्णकालिक डायरेक्टर की नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल की साख और सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सक्षम और स्थायी नेतृत्व अनिवार्य है। अब सभी की नजर संबंधित विभाग के निर्णय पर टिकी है कि जीबी पंत जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान को पूर्णकालिक नेतृत्व कब तक मिल पाता है।

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संवाददाता

Tirthankar Sarkar

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