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Future Warfare Course: भविष्य की जंग के लिए तीनों सेनाओं का साझा मंथन, AI से क्वांटम और साइबर वॉरफेयर तक चार सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग

Future Warfare Course: भविष्य की जंग के लिए तीनों सेनाओं का साझा मंथन, AI से क्वांटम और साइबर वॉरफेयर तक चार सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग

नई दिल्ली, 30 अगस्त। भविष्य के युद्ध अब केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रहने वाले हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर वॉरफेयर, कॉग्निटिव वॉरफेयर, अंतरिक्ष और स्वायत्त हथियार प्रणालियां आने वाले समय में युद्ध के तौर-तरीकों को तेजी से बदल सकती हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आयोजित चौथा त्रि-सेवा फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स शनिवार को संपन्न हो गया।

मानेकशॉ सेंटर में चार सप्ताह तक चले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से भविष्य की सैन्य चुनौतियों और बदलती युद्ध तकनीकों पर मंथन किया। सैन्य अधिकारियों के साथ वैज्ञानिकों, नीति विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भी इसमें भाग लिया।

कोर्स का उद्देश्य भविष्य के युद्धक्षेत्र में उभरने वाली तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियों को समझने के साथ तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना रहा। इसमें इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि आधुनिक तकनीक किस तरह पारंपरिक युद्ध प्रणाली को बदल रही है और भविष्य की सैन्य तैयारियों में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भविष्य के युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए इसके सैन्य इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। एआई आधारित निर्णय प्रणाली, डेटा विश्लेषण, निगरानी और स्वायत्त हथियार प्रणालियों की बढ़ती भूमिका पर प्रतिभागियों ने विचार-विमर्श किया।

स्वायत्त हथियार प्रणालियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। भविष्य के युद्धक्षेत्र में मानवरहित और स्वचालित प्रणालियों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इनकी सैन्य क्षमता और संचालन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई।

क्वांटम टेक्नोलॉजी को भी भविष्य की सैन्य क्षमताओं से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया गया। तेजी से विकसित होती इस तकनीक का संचार, कंप्यूटिंग और सुरक्षा प्रणालियों पर संभावित प्रभाव समझने का प्रयास किया गया।

साइबर वॉरफेयर को आधुनिक युद्ध की प्रमुख चुनौतियों में से एक मानते हुए डिजिटल नेटवर्क और महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों की सुरक्षा पर मंथन हुआ। भविष्य में किसी संघर्ष के दौरान साइबर हमले पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के साथ एक महत्वपूर्ण मोर्चा बन सकते हैं।

कोर्स में कॉग्निटिव और सूचना युद्ध पर भी विशेष चर्चा की गई। आधुनिक संघर्षों में केवल हथियारों के माध्यम से नहीं, बल्कि सूचना, धारणा और मनोवैज्ञानिक प्रभाव के जरिए भी रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में सूचना युद्ध से निपटने के लिए सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए स्पेस आधारित क्षमताओं और भविष्य के युद्ध में उनकी भूमिका पर भी विचार किया गया। संचार, निगरानी और सैन्य अभियानों में अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों की उपयोगिता को देखते हुए इसे भविष्य की सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

मल्टी-डोमेन ऑपरेशन भी प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में शामिल रहा। इसके तहत जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष, साइबर और सूचना क्षेत्र में उपलब्ध क्षमताओं का समन्वित इस्तेमाल कर सैन्य अभियान संचालित करने की रणनीतियों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने प्रतिभागियों से संवाद किया। उन्होंने भविष्य के युद्ध की चुनौतियों और बदलती तकनीक के अनुरूप सैन्य तैयारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

चार सप्ताह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों के साथ वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भागीदारी के जरिए रक्षा क्षेत्र में तकनीक, रणनीति और सैन्य आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने का प्रयास किया गया।

चौथे त्रि-सेवा फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स के समापन के बाद अब इसके पांचवें संस्करण की तैयारी की जा रही है। पांचवां फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स 16 नवंबर से 11 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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