Mathura : मथुरा में बागेश्वर पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में धर्मनगरी वृंदावन का संत समाज और जाने-माने धर्माचार्य खुलकर मैदान में आ गए हैं। वृंदावन में आयोजित संत, धर्माचार्यों और कथावाचकों की एक अहम बैठक के दौरान संतों ने संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान के जोरदार नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
बैठक में उपस्थित धर्माचार्यों ने एक स्वर में कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री का बयान गलत नहीं है, बल्कि समस्या उन लोगों की मानसिकता में है जो उनके अर्थ को समझ नहीं पा रहे हैं। संतों ने स्पष्ट किया कि भगवान श्रीराम का अवतार मर्यादा की स्थापना के लिए हुआ था और भगवान श्रीकृष्ण का अवतार लीलाओं के लिए, इसलिए दोनों के प्रसंगों में अंतर होना स्वाभाविक है।
धर्माचार्यों ने आरोप लगाया कि एक सोची समझी रणनीति के तहत सनातन धर्म और संतों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। देश में हो रहे इस्लामी और ईसाईकरण के खिलाफ संत और धर्माचार्य ही सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं, इसी वजह से उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। संतों ने चेतावनी दी कि यदि सनातन के ऋषि मुनियों, संतों, कथावाचकों और ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया तो आगामी चुनावों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
बैठक के दौरान अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए संतों ने कहा कि यदि उन्हें सनातन धर्म और भगवान कृष्ण से वाकई प्रेम है तो मथुरा में औरंगजेब और बाबर द्वारा कृष्ण जन्मभूमि पर बनाए गए कब्जे और मस्जिद के खिलाफ अभियान चलाएं। संत समाज उनके पीछे चलेगा, अन्यथा मुस्लिम वोट बैंक के लिए संतों को नीचा दिखाने का यह तरीका अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्ष्ण दास महाराज, गोविंद आनंद तीर्थ महाराज, कृष्ण चंद्र शास्त्री, संजीव कृष्ण ठाकुर, शिवम साधक, पूर्ण कौशिक, मृदुल कांत शास्त्री, मनीष चतुर्वेदी, महामंडलेश्वर कृष्णानंद, रामचंद्र दास, देवांशु, शिवांश भाई मिश्रा, अश्वनी मिश्रा, हरिवंश मिश्रा, रोहित रिछारिया, गुरु प्रसाद, हरिहर मुद्गल शास्त्री, सुमंत शास्त्री, अरविंद कृष्ण, देवानंद महाराज, विनय त्रिपाठी, धनंजय दास, मलूक पीठ से रसराज महाराज, अतुल कृष्ण और संजय पंडित सहित कई अन्य संत महंतों ने सनातन धर्म और पंडित धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में हुंकार भरी।





