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GTB Hospital Newborn Kidnapping: जीटीबी अस्पताल में नवजात के कथित अपहरण पर बाल अधिकार आयोग सख्त, 240 में से अधिकांश CCTV कैमरे खराब मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

GTB Hospital Newborn Kidnapping: जीटीबी अस्पताल में नवजात के कथित अपहरण पर बाल अधिकार आयोग सख्त, 240 में से अधिकांश CCTV कैमरे खराब मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

रिपोर्ट: रवि डालमिया

पूर्वी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल परिसर से नवजात शिशु के कथित अपहरण के मामले में दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आयोग के निरीक्षण में सामने आया कि अस्पताल में लगे करीब 240 सीसीटीवी कैमरों में से अधिकांश खराब पड़े थे। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस फार्मेसी भवन से कथित तौर पर नवजात का अपहरण हुआ, वहां घटना से पहले न तो सीसीटीवी कैमरे लगे थे और न ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था। इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने 19 अक्टूबर को GTB अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान आयोग ने अस्पताल के विभिन्न विभागों, संवेदनशील स्थानों और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद तैयार की गई तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल प्रशासन ने टीम को बताया कि परिसर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे पिछले करीब दो महीने से खराब पड़े थे। कैमरों की स्थापना और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग के पास है।

आयोग ने इस स्थिति को गंभीर लापरवाही मानते हुए सवाल उठाया है कि इतने बड़े सरकारी अस्पताल में सुरक्षा निगरानी व्यवस्था लंबे समय तक खराब कैसे रह सकती है। अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीज और उनके परिजन आते हैं। ऐसे में सीसीटीवी कैमरों का काम नहीं करना न केवल सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है, बल्कि किसी घटना के बाद संदिग्धों की पहचान और जांच में भी बड़ी बाधा पैदा कर सकता है। नवजात शिशुओं और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से यह कमी और अधिक चिंताजनक है।

निरीक्षण के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि GTB अस्पताल में प्रतिदिन करीब आठ हजार मरीज आते हैं और लगभग 60 प्रसव होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों और नवजात शिशुओं की मौजूदगी के बावजूद अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं होने की बात सामने आई। आयोग ने प्रसूति वार्ड, नवजात शिशु इकाई, बाल चिकित्सा विभाग और अस्पताल के प्रवेश तथा निकास द्वारों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। आयोग का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में नवजात बच्चों की आवाजाही और परिजनों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था होना जरूरी है।

PWD और अस्पताल प्रशासन से मांगा जवाब

आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए GTB अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर और लोक निर्माण विभाग के संबंधित कार्यकारी अभियंता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अधिकारियों से पूछा गया है कि अस्पताल परिसर में कुल कितने सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, उनमें से कितने चालू हैं और कितने खराब पड़े हैं। साथ ही प्रत्येक खराब कैमरे के बंद होने की तारीख, मरम्मत के लिए की गई शिकायतों और उन शिकायतों पर विभाग की ओर से की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देने को कहा गया है।

इसके अलावा अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों की कुल संख्या, उनकी ड्यूटी का रोस्टर और अलग-अलग विभागों तथा संवेदनशील स्थानों पर उनकी तैनाती से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। आयोग यह जानना चाहता है कि जब अस्पताल में इतने बड़े स्तर पर मरीजों और नवजात शिशुओं की आवाजाही होती है तो सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जा रही थी और फार्मेसी भवन जैसे स्थान पर सुरक्षा गार्ड तथा सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था क्यों नहीं थी।

आयोग ने अस्पताल प्रशासन से सभी संवेदनशील क्षेत्रों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की अपेक्षा जताई है। साथ ही नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी पहचान प्रणाली लागू करने, परिजनों के लिए प्रवेश पास की व्यवस्था करने और अस्पताल के प्रवेश तथा निकास द्वारों पर नियंत्रित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है। ऐसी व्यवस्था से यह पता लगाया जा सकेगा कि नवजात शिशु को अस्पताल से कौन ले जा रहा है और वह व्यक्ति बच्चे का अधिकृत परिजन है या नहीं।

निरीक्षण तक नहीं मिला था लापता नवजात

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आयोग के निरीक्षण की तारीख यानी 19 अक्टूबर तक लापता नवजात शिशु का कोई सुराग नहीं मिला था। आयोग ने पुलिस से बच्चे की तलाश में अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान, अस्पताल परिसर और आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच तथा बच्चे की बरामदगी के लिए किए गए प्रयासों का विवरण शामिल है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि नवजात की बरामदगी होने तक मामले की निगरानी जारी रखी जाएगी। साथ ही अस्पताल प्रशासन और PWD के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।

GTB अस्पताल में सामने आई सुरक्षा संबंधी खामियां सरकारी अस्पतालों में मरीजों और खासकर नवजात बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगाना, उनकी नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत कराना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। वहीं संवेदनशील विभागों में पर्याप्त सुरक्षा गार्डों की तैनाती भी जरूरी है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन और PWD आयोग को क्या जवाब देते हैं और नवजात की तलाश के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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