Delhi 44 Lakh Robbery: दिल्ली में 44 लाख रुपये की दिनदहाड़े लूट का खुलासा, मुख्य आरोपी समेत 6 गिरफ्तार; 26.41 लाख रुपये और पिस्टल बरामद
राष्ट्रीय राजधानी के शाहदरा जिले में दिनदहाड़े हथियार के बल पर अंजाम दी गई 44 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट की गुत्थी को सुलझाते हुए दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। शाहदरा जिला पुलिस की विशेष टीम ने कई हफ्तों तक चले सघन ऑपरेशन के बाद मुख्य शूटर और साजिशकर्ता समेत कुल छह शातिर अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर लूटी गई रकम में से 26 लाख 41 हजार 500 रुपये की नकद राशि जब्त कर ली है। इसके अतिरिक्त घटना में इस्तेमाल की गई एक पिस्टल, जिंदा मैगजीन, भागने में प्रयुक्त स्विफ्ट डिजायर कार और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक, यह घटना 27 अगस्त 2026 को मानसरोवर पार्क (एमएस पार्क) थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। हथियारबंद बदमाशों ने नकदी का परिवहन कर रहे व्यक्ति को दिनदहाड़े बीच सड़क पर रोक लिया था और पिस्टल दिखाकर 44 लाख रुपये से भरा बैग लूटकर भाग निकले थे। वारदात के बिना देरी किए बाद एमएस पार्क थाने में एफआईआर संख्या 248/2026 दर्ज कर पड़ताल शुरू की गई थी। दिनदहाड़े हुई इतनी बड़ी डकैती की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कई विशेष टीमें गठित की गईं, जिन्होंने वारदातस्थल से लेकर भागने के समस्त संभावित मार्गों के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस का विस्तृत विश्लेषण किया, जिससे साफ हुआ कि घटना में दिल्ली और उत्तर प्रदेश का संगठित सिंडिकेट शामिल था।
पड़ताल आगे बढ़ी तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि लूट को अंजाम देने के उद्देश्य से नकदी की आवाजाही की सटीक अंदरूनी जानकारी का सहारा लिया गया था। पुलिस ने सबसे पहले साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड प्रंजय तिवारी, सरब तिवारी उर्फ प्रफुल, गौरव तिवारी, अम्बरीश तिवारी उर्फ चंचल और रामजीत को पकड़ लिया। शुरुआती कार्रवाई में इन पांचों के पास से लूटी गई रकम में से 3 लाख 90 हजार रुपये, घटना में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार और तीन मोबाइल फोन जब्त किए गए। पुलिस पड़ताल में साबित हुआ कि प्रंजय तिवारी ने नकदी ले जाने के समय और रास्ते की गोपनीय सूचना बाहरी शूटरों तक पहुंचाई थी, जबकि अन्य आरोपियों की ओर से रेकी करने, सुरक्षित ठिकानों का प्रबंध करने और लूट के बाद शूटरों को पनाह देने का काम किया था।
घटना का मुख्य आरोपी और हथियार के बल पर लूट करने वाला सत्यम विश्वकर्मा उर्फ डेविल वारदात के बाद से ही पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। उसकी तलाश में दिल्ली पुलिस की दलों ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में निरंतर छापेमारी की। इसी क्रम में पुलिस दल ने यूपी के सुल्तानपुर जिले स्थित एरुल इलाके में दबिश दी और आरोपी सत्यम विश्वकर्मा की 19 वर्षीय बहन के पास से लूटी गई नकदी में से 22 लाख 51 हजार 500 रुपये जब्त किए। पुलिस ने संबंधित युवती को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के अंतर्गत विधिक रूप से पाबंद किया। इसके उपरांत 16 अक्टूबर 2026 को मुख्य आरोपी सत्यम विश्वकर्मा उर्फ डेविल को उत्तर प्रदेश से प्रोडक्शन वारंट पर दिल्ली लाकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर चार दिन की पुलिस हिरासत में लिया गया।
पुलिस रिमांड के दौरान गहन पूछताछ में आरोपी सत्यम विश्वकर्मा पुलिस दल को सुल्तानपुर में हलियापुर-कुड़वार रोड पर स्थित गोमती कुड़वार पुल के पास ले गया, जहां 18 अक्टूबर को उसकी निशानदेही पर सड़क किनारे झाड़ियों से घटना में इस्तेमाल की गई एक पिस्टल और मैगजीन जब्त की गई। आरोपी ने स्वीकार किया कि घटना के बाद भागते समय उसने यह हथियार वहां छुपा दिया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य आरोपी सत्यम विश्वकर्मा और सरब तिवारी पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग थानों में पहले से कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। शाहदरा जिला पुलिस के मुताबिक, छह आरोपियों की गिरफ्तारी और 26.41 लाख रुपये की रिकवरी से एक बड़े अंतरराज्यीय डकैती गिरोह का पूरी तरह से भंडाफोड़ हो गया है।





