Harak Singh Rawat Case: 23 साल पुराने मामले में फिर दुष्कर्म के आरोप, महिला ने मांगी नई जांच; रावत ने बताया राजनीतिक साजिश
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से संबंधित लगभग 23 वर्ष पुराना प्रकरण फिर सुर्खियों में आ गया है। शनिवार को देहरादून में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाने वाली महिला ने दुष्कर्म और शोषण के अपने आरोपों को दोहराया। पूर्व में हुई जांच पर प्रश्न उठाते हुए उन्होंने मांग की कि सीबीआई से नए सिरे से जांच कराई जाए और उनके बेटे का डीएनए परीक्षण दोबारा हो। उधर, हरक सिंह रावत ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि पिछली जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। मामले को फिर से उछाले जाने को उन्होंने राजनीतिक साजिश करार दिया है।
महिला के मुताबिक, उन्होंने अपनी शिकायत और मांगों से संबंधित पत्र उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को सौंपा है। उनका कहना है कि पिछली जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का समुचित मौका नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट करने और पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी उन्होंने रखी है। महिला के अनुसार, वह निष्पक्ष जांच चाहती हैं और अपने बेटे के लिए न्याय की मांग कर रही हैं।
मीडिया के सामने महिला ने आरोप लगाया कि जिस समय घटना हुई, वह नाबालिग थीं और उनसे दुष्कर्म किया गया। उनका यह भी दावा है कि बाद में किसी संस्था में रखने का बहाना बनाकर उन्हें मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया। महिला के अनुसार, उसी अवधि में उनसे कुछ ऐसे कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए, जिनमें लिखी बातें उन्हें ठीक से नहीं समझाई गईं। ये आरोप महिला की ओर से लगाए गए हैं और रावत ने इनका खंडन किया है।
महिला ने भाषा से जुड़ी दिक्कत का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, उस दौर में उन्हें हिंदी ठीक से समझ नहीं आती थी, इसलिए जांच की प्रक्रिया और कागजात को समझना उनके लिए कठिन रहा। उनका आरोप है कि उनकी परिस्थिति और हालात को देखते हुए उनकी बात को विस्तार से नहीं सुना गया।
पिछली सीबीआई जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए महिला ने दावा किया कि अधिकारी उनसे मिलने संबंधित संस्था में सिर्फ एक बार आए थे। उनका कहना है कि अपना पक्ष रखने और घटनाओं को स्पष्ट करने के लिए उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिला। पहले कराए गए डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया को भी उन्होंने संदिग्ध बताया और दोबारा परीक्षण कराने की मांग रखी।
महिला के अनुसार, उनका बेटा अब बालिग हो चुका है और वह उसके पितृत्व के सवाल पर साफ उत्तर चाहती हैं। नार्को परीक्षण कराने की मांग भी उन्होंने की है। हालांकि, किसी जांच या परीक्षण की मांग करना और उसका अधिकृत प्रक्रिया के तहत कराया जाना, दोनों अलग बातें हैं। अभी तक नए डीएनए या नार्को परीक्षण को लेकर कोई पुष्ट आदेश सामने नहीं आया है।
आरोपों के जवाब में हरक सिंह रावत ने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें उन्हें क्लीन चिट दी गई थी। उनके अनुसार, अदालत भी इस प्रकरण को बंद कर चुकी है। रावत का आरोप है कि पुराने मामले को फिर से उठाकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
रावत ने चेतावनी दी कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और उनकी छवि खराब करने की कोशिश करने वाले अन्य लोगों पर मानहानि का मुकदमा करेंगे। उनका कहना है कि जांच में राहत मिलने के बावजूद राजनीतिक मकसद से यह मामला उठाया जा रहा है। डीएनए जांच दोबारा कराने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि न्यायालय की अनुमति होने पर वह इसके लिए तैयार हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व को घेरा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और न्याय की बातें करने वाले कांग्रेस नेताओं को अपने वरिष्ठ नेता पर लगे आरोपों के बारे में जवाब देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उत्तराखंड कांग्रेस नेतृत्व की खामोशी पर भी प्रश्न उठाए।
पलटवार करते हुए रावत ने भाजपा की नीयत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि अगर भाजपा उन्हें दोषी समझती थी, तो 2016 में उन्हें पार्टी में क्यों शामिल किया गया और आगे चलकर विधायक व मंत्री बनने का मौका क्यों दिया गया। उनका आरोप है कि प्रदेश के दूसरे मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह पुराना मामला उछाला जा रहा है।
यह मामला पहली बार वर्ष 2003 में सुर्खियों में आया था, तब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी। उस समय महिला ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत पर आरोप लगाए थे। विवाद गहराने के बाद रावत ने मंत्री पद छोड़ दिया था और प्रकरण की सीबीआई जांच कराई गई थी। पिछली जांच में डीएनए नमूनों का मिलान न होने और रावत को राहत मिलने की बात सामने आई थी। अब महिला उसी जांच और परीक्षण प्रक्रिया पर प्रश्न उठा रही हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री धामी द्वारा इस पुराने मामले का जिक्र किए जाने के बाद से राजनीतिक बयानबाजी ने जोर पकड़ा है। महिला का कहना है कि इससे उन्हें अपनी मांग फिर से उठाने की आस जगी। दूसरी ओर, रावत इसे आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही राजनीतिक कवायद बता रहे हैं।
अभी की स्थिति में महिला नई जांच और परीक्षण की मांग कर रही हैं, वहीं रावत पिछली जांच और न्यायिक कार्यवाही का हवाला देते हुए आरोपों को नकार रहे हैं। आगे क्या होगा, यह शिकायत पर संबंधित अधिकारियों के फैसले, पुराने रिकॉर्ड और किसी नई जांच में मिलने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। आरोपों और राजनीतिक बयानों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।





