Saturday, 24 October 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
New Delhi : दिल्ली क्वीन ब्यूटी पेजेंट 2026 का आयोजन, मुस्कान सेन बनीं विजेताChandigarh : दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने ऊपर से दबाव का हवाला देकर मुझे 2 घंटे तक रोककर रखा- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मानChandigarh : वोट-चोरी’ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा; एसआईआर को तुरंत रद्द किया जाए- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मानTiger Shroff Firing Case: सलमान खान और रणबीर कपूर के घरों की रेकी का दावा, टाइगर पर फायरिंग के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा बढ़ाने की मांगIndia China Border Face-Off: अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ कई जगह टकराव जारी, ITBP प्रमुख के बयान पर विदेश मंत्रालय ने दी प्रतिक्रियाOdisha Bike Theft Gang: ओडिशा में बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश, 11 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद; नाबालिग समेत 8 लोग पकड़े गएBhopal Assault Case: भोपाल के रॉयल मार्केट में युवक से बेरहमी से मारपीट, तीन आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने घटनास्थल पर निकाला जुलूसHaryana Power Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, CM नायब सिंह सैनी ने निजी कंपनी का लाइसेंस रद्द कराने का दिया आश्वासन

Drug Rules: फर्जी वैज्ञानिक डेटा देने वाली दवा कंपनियों पर होगी सख्त कार्रवाई, नए आवेदन भी हो सकेंगे प्रतिबंधित

Drug Rules: फर्जी वैज्ञानिक डेटा देने वाली दवा कंपनियों पर होगी सख्त कार्रवाई, नए आवेदन भी हो सकेंगे प्रतिबंधित

नई दिल्ली। दवाओं की मंजूरी के लिए फर्जी या मनगढ़ंत वैज्ञानिक आंकड़े प्रस्तुत करने वाली दवा कंपनियों के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए ऐसा प्रावधान किया है, जिसके तहत गलत डेटा देने वाली कंपनियों को एक निर्धारित अवधि तक नए आवेदन करने से भी रोका जा सकेगा। इस कदम का उद्देश्य दवा मंजूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।

नए नियमों के अनुसार संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी ऐसे आवेदकों के भविष्य के आवेदन स्वीकार करने पर रोक लगा सकेगी, यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा या प्रभावशीलता से जुड़े फर्जी वैज्ञानिक आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। इससे पहले ऐसे मामलों में केवल आवेदन खारिज करने या मौजूदा लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जाती थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि वैज्ञानिक आंकड़े दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के मूल्यांकन का सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं। यदि इनमें हेरफेर की जाती है तो इससे न केवल नियामकीय प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि नए नियमों में कंपनियों के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया है। किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित कंपनी को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) दिया जाएगा और उसे अपना पक्ष रखने तथा अपील करने का पूरा अधिकार मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस संशोधन से दवा उद्योग में जवाबदेही बढ़ेगी और वैज्ञानिक प्रमाणों की विश्वसनीयता तथा नियामकीय व्यवस्था और मजबूत होगी।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें