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Food Is Medicine: एम्स में मंथन, इलाज के साथ पोषण और लाइफस्टाइल को मेडिकल शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर

Food Is Medicine: एम्स में मंथन, इलाज के साथ पोषण और लाइफस्टाइल को मेडिकल शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर

नई दिल्ली, 31 जुलाई (नवोदय टाइम्स): क्या केवल दवाइयां ही बीमारी का इलाज हैं या सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली भी कई बीमारियों की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकती है? इसी सवाल को केंद्र में रखकर एम्स दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों, पोषण वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर चर्चा की।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘फूड इज मेडिसिन’ की अवधारणा को चिकित्सा शिक्षा और रोजमर्रा की क्लीनिकल प्रैक्टिस का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। उनके मुताबिक भविष्य के डॉक्टरों को केवल दवाइयां लिखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मरीजों को सही पोषण, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में भी वैज्ञानिक सलाह देने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खान-पान और जीवनशैली से जुड़े पहलुओं को उपचार व्यवस्था में शामिल करने से गैर-संचारी रोगों का बोझ कम करने और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बीमारी होने के बाद उपचार करने के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

संगोष्ठी में एम्स निदेशक डॉ. निखिल टंडन, डॉ. गोविंद मखारिया और अन्य विशेषज्ञों ने मेडिकल पाठ्यक्रम में पोषण विज्ञान और लाइफस्टाइल मेडिसिन को अधिक महत्व देने की आवश्यकता बताई। विभिन्न सत्रों में मोटापा, मिर्गी, ऑटिज्म, मेटाबॉलिक बीमारियों, मांसपेशियों के स्वास्थ्य और हाई-फैट डाइट के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई।

एक वैज्ञानिक सत्र में मोनोसोडियम ग्लूटामेट के सीमित और वैज्ञानिक उपयोग के जरिए भोजन में सोडियम की मात्रा कम करने की संभावनाओं पर भी शोध आधारित निष्कर्ष साझा किए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पोषण से जुड़े विषयों पर चर्चा करते समय वैज्ञानिक प्रमाण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

एम्स के फिजियोलॉजी विभाग, फूड फ्यूचर फाउंडेशन और कोएलिशन फॉर फूड सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन इन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में चिकित्सकों, पोषण वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और मेडिकल शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान ‘पोषण, आहार और जीवन शैली: नैदानिक अभ्यास में आहार, भोजन, पोषण और जीवन शैली सीखना और सिखाना’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक निवारक, रोगी-केंद्रित और वेलनेस आधारित बनाने के लिए पोषण, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली को चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना होगा।

 

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