दिल्ली

Legal Aid Focus: DISHA 2.0 से घर-घर पहुंचेगी कानूनी मदद, तकनीक के सहारे मुफ्त कानूनी सलाह और न्याय सेवाओं का दायरा होगा व्यापक

Legal Aid Focus: DISHA 2.0 से घर-घर पहुंचेगी कानूनी मदद, तकनीक के सहारे मुफ्त कानूनी सलाह और न्याय सेवाओं का दायरा होगा व्यापक

नई दिल्ली, 31 जुलाई : आम लोगों तक सस्ती, आसान और समय पर कानूनी सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस यानी DISHA 2.0 योजना को देशभर में लागू करने का फैसला किया है। वर्ष 2026 से 2031 तक चलने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य तकनीक की मदद से न्याय सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है।

कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बताया कि DISHA 2.0 के तहत आम नागरिकों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए कई डिजिटल और जमीनी स्तर की पहल को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य विशेष रूप से उन लोगों तक कानूनी मदद पहुंचाना है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से कानूनी सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते।

योजना के तहत टेली-लॉ सुविधा के माध्यम से नागरिकों को मुकदमा दर्ज होने से पहले मुफ्त कानूनी सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा न्याय बंधु कार्यक्रम के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को प्रो-बोनो कानूनी सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था होगी। कानूनी साक्षरता और जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी।

DISHA 2.0 के तहत विधि-संजीवनी नामक एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योजना की प्रगति और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। डिजिटल व्यवस्था से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कानूनी सहायता योजनाओं का लाभ किस क्षेत्र तक पहुंच रहा है और किन इलाकों में अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता है।

सरकार का कहना है कि योजना की नियमित समीक्षा के साथ क्षेत्रीय कार्यशालाओं और विशेष प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट के माध्यम से इसके क्रियान्वयन को मजबूत किया जाएगा। खासतौर पर दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक कानूनी सहायता प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर रहेगा।

DISHA 2.0 के जरिए सरकार का प्रयास है कि कानूनी सहायता केवल अदालतों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिकों को किसी विवाद या कानूनी परेशानी के शुरुआती चरण में ही उचित सलाह उपलब्ध हो सके। तकनीक और जमीनी नेटवर्क के संयोजन से न्याय तक पहुंच को आसान बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

Related Articles

Back to top button