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Mule Account Gang: ‘म्यूल अकाउंट’ गैंग का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार, 74 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े खाते सीज

Mule Account Gang: ‘म्यूल अकाउंट’ गैंग का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार, 74 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े खाते सीज

नोएडा। साइबर अपराधियों तक ठगी की रकम पहुंचाने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ गिरोह का नोएडा पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। फेस-3 थाना पुलिस ने गिरोह से जुड़े सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने ऐसे 74 बैंक खातों को सीज किया है, जिनका संबंध देशभर में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से सामने आया है।

एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद खातों से जुड़े मोबाइल फोन में विशेष APK एप्लीकेशन इंस्टॉल की जाती थी। ऐप एक्टिव होने के बाद बैंक से आने वाले एसएमएस और ओटीपी गिरोह के सरगना तक पहुंच जाते थे। इन ओटीपी की मदद से साइबर अपराधी बैंक खातों में जमा ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर या निकाल लेते थे।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पिछले दो से छह महीने से नोएडा में रहकर म्यूल अकाउंट तैयार करने और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजब सिंह निवासी फर्रुखाबाद, प्रदीप निवासी दिल्ली, गुलाब सिंह लोधी निवासी विदिशा, कौशल निवासी फर्रुखाबाद, सचिन निवासी फर्रुखाबाद, जिनेंद्र सिंह निवासी कन्नौज और प्रियंका निवासी आगरा के रूप में हुई है।

गिरफ्तार आरोपियों में डी-फार्मा, बीएससी, बीए और 12वीं तक पढ़े युवक-युवतियां शामिल हैं। पुलिस अब इनके आपराधिक नेटवर्क और साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

कमीशन लेकर आगे ट्रांसफर करते थे रकम

पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी से प्राप्त रकम का एक हिस्सा कमीशन के रूप में गिरोह के सदस्यों को मिलता था। इसके बाद बाकी रकम दूसरे बैंक खातों और यूएसडीटी के माध्यम से आगे ट्रांसफर कर दी जाती थी। पुलिस के अनुसार, कुछ समय बाद पुराने बैंक खाते बंद कर नए खाते खुलवाए जाते थे, ताकि जांच एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके।

जांच में यह भी सामने आया कि इन म्यूल खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कैम के जरिए ठगी गई रकम को जमा करने के लिए किया जाता था। बाद में इन्हीं खातों को दूसरे साइबर अपराधियों को भी उपलब्ध कराया जाता था और इसके बदले गिरोह मोटा कमीशन लेता था।

होटल से चल रहा था पूरा नेटवर्क

पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग होटल में कमरे लेकर म्यूल अकाउंट तैयार करने और साइबर ठगी की रकम को आगे पहुंचाने का नेटवर्क चला रहे हैं। सूचना के आधार पर फेस-3 थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए होटल में छापा मारा और सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक चेकबुक, एक स्टांप और चार लेटरहेड बरामद किए गए हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे छिपाने और फिर एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। अक्सर इन खातों को दूसरे लोगों के नाम पर खुलवाया या खरीदा जाता है। ऐसे खातों की मदद से साइबर अपराधी रकम की वास्तविक कड़ी छिपाने की कोशिश करते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए मुख्य आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

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