Greater Noida West Road: ग्रेनो वेस्ट में आवागमन सुगम होगा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से चार मूर्ति यानी गौर चौक से तुस्याना कट तक करीब 8.2 किलोमीटर सड़क को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है। यह मार्ग इलाके के व्यस्त हिस्सों में गिना जाता है और यहां बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए सड़क क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है। परियोजना पूरी होने से वाहन चालकों को आवाजाही में राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसका वास्तविक असर काम पूरा होने और मार्ग की उपलब्ध क्षमता के उपयोग पर निर्भर करेगा।
सड़क चौड़ीकरण का लक्ष्य लगभग दो महीने में काम पूरा करना बताया गया है। इसके साथ ही गौर चौक अंडरपास को दिवाली से पहले चालू किए जाने की उम्मीद जताई गई है। सड़क चौड़ीकरण और अंडरपास का उद्देश्य व्यस्त चौराहे और आसपास के मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करना है। यदि दोनों काम तय समय में पूरे होते हैं, तो इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को आने-जाने में सुविधा मिल सकती है। फिलहाल लक्ष्य और उम्मीद को निर्धारित समयसीमा के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि काम पूरा होने की पुष्टि के रूप में।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आवासीय सोसाइटियों और अन्य विकास के कारण यातायात की मांग बढ़ी है। व्यस्त समय में अधिक वाहन एक ही मार्ग पर आने से जाम की समस्या हो सकती है। ऐसे में सड़क की चौड़ाई बढ़ाना, जंक्शन पर यातायात व्यवस्था बेहतर करना और अंडरपास जैसी संरचनाओं को चालू करना यातायात प्रबंधन के अलग-अलग हिस्से हैं। परियोजना की सफलता इस बात से भी जुड़ी होगी कि निर्माण के दौरान यातायात को किस तरह संभाला जाता है।
गौर चौक से तुस्याना कट तक प्रस्तावित दूरी करीब 8.2 किलोमीटर है, इसलिए काम के दौरान विभिन्न हिस्सों में वाहनों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के लिए जरूरी होगा कि कार्यस्थल के आसपास यातायात को व्यवस्थित रखा जाए और यात्रियों को परेशानी कम हो। अंडरपास चालू होने की स्थिति में भी उसके उपयोग और आसपास के जंक्शनों पर यातायात का प्रवाह महत्वपूर्ण रहेगा।
परियोजना से क्षेत्र में आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है। सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब दो महीने का लक्ष्य तथा दिवाली से पहले अंडरपास चालू होने की संभावना सामने आई है। वास्तविक राहत का आकलन काम पूरा होने के बाद ही हो सकेगा, जब वाहन चालक नए इंतजामों का उपयोग करेंगे और मार्ग पर यातायात के दबाव में होने वाले बदलाव स्पष्ट होंगे।




