Cyber Fraud Bank Accounts: ठगों को बैंक खाते मुहैया कराने का आरोपी गिरफ्तार
साइबर ठगी करने वालों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के आरोप में 21 वर्षीय मोहम्मद समीर को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर का निवासी बताया गया है और उसे गुरुग्राम में गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उसके बैंक खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम के लेनदेन में किया गया। जांच इस बात पर केंद्रित है कि खाते किस तरह उपलब्ध कराए गए, उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में हुआ और आरोपी की भूमिका किस हद तक थी।
इस मामले से जुड़ी जांच में 13 राज्यों से दर्ज 33 शिकायतों का उल्लेख सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, एक पीड़ित को 20 अगस्त 2025 से 18 नवंबर 2025 के बीच फेसबुक और व्हाट्सऐप पर मिले लिंक के जरिये ठगी का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर साझा किए गए लिंक के जरिए होने वाली ठगी के मामलों में पीड़ित को भेजे गए संदेश, लेनदेन का रिकॉर्ड और इस्तेमाल किए गए खातों की जानकारी जांच में अहम हो सकती है। इन तथ्यों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि रकम कहां गई और अलग-अलग शिकायतों में कोई साझा कड़ी है या नहीं।
पुलिस के अनुसार, मामले में पहले भी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। समीर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क में उसकी भूमिका और दूसरे लोगों से संबंध की पड़ताल कर रही हैं। बैंक खाता उपलब्ध कराने के आरोप की जांच में यह देखना जरूरी है कि खाते किसके नाम पर थे, उन पर किसका नियंत्रण था और उनमें हुए लेनदेन का ठगी की शिकायतों से क्या संबंध है। सभी शिकायतों को आपस में जोड़ने के लिए रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।
मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। कई राज्यों से शिकायतें सामने आने के कारण जांच का दायरा एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पुलिस शिकायतकर्ताओं की जानकारी, बैंकिंग लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से कथित गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। हालांकि हर शिकायत में आरोपी की भूमिका और संबंधित लेनदेन का संबंध जांच से प्रमाणित होना बाकी है।
फिलहाल मोहम्मद समीर को गिरफ्तार किया गया है और उससे जुड़े बैंक खातों तथा शिकायतों की जांच जारी है। गिरफ्तारी और शिकायतों की संख्या मामले का दायरा बताती हैं, लेकिन आरोपी की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा। पुलिस यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि खाते साइबर ठगी में किस तरह इस्तेमाल हुए और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्य कौन हैं।




