Friday, 30 October 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Haryana Sports Awards:  पदक कुछ क्षणों में गले में डलता है, लेकिन उसे हासिल करने के लिए खिलाड़ी अपना जीवन लगा देता है : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीHaryana: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन संघर्ष और राष्ट्र सेवा की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनीLucknow : बच्चों की सेहत और पोषण की प्रहरी बनी योगी सरकार, भोजन परोसने से पहले गुणवत्ता जांचने की व्यवस्थाLucknow : बारिश से प्रभावित लोगों की मदद कर दिलाएं राहत- मुख्यमंत्रीMathura : मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दान में पारदर्शिता, सोने-चांदी की जांच के लिए लगी अत्याधुनिक मशीनNoida Cyber Fraud Cases: ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर 36 लाख से अधिक ऐंठेNoida Mati Kala Mahotsav: नोएडा में दीवाली पर सजेगा ‘माटी कला महोत्सवDelhi Vehicle Entry Restrictions: सीमाओं पर बढ़ी सख्ती, नोएडा के 1.50 लाख वाहनों को रोकने के लिए चार टीमें तैनात

Yamuna Expressway Underpass: यमुना एक्सप्रेसवे अंडरपास की छत से प्लास्टर गिरा

Yamuna Expressway Underpass: यमुना एक्सप्रेसवे अंडरपास की छत से प्लास्टर गिरा

नोएडा। ग्रेटर नोएडा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के सामने घरबरा गांव के पास यमुना एक्सप्रेसवे अंडरपास की छत से सीमेंट और प्लास्टर के टुकड़े गिर रहे हैं। कई जगह प्लास्टर उखड़ने से लोहे के सरिये दिखने लगे हैं। अधिकारियों ने पत्थर गिरने वाली जगह पर वाहनों की आवाजाही रोक दी है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त हिस्से का संज्ञान लिया। अंडरपास के सामने बैरिकेडिंग की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मरम्मत कराई जाएगी।

करीब 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे का निर्माण जेपी ग्रुप ने किया था। इसका उद्घाटन 9 अगस्त 2012 को हुआ था। करीब 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे को शुरू हुए लगभग 14 साल हो चुके हैं।

जेपी ग्रुप के दिवालिया होने के बाद एक्सप्रेसवे के रखरखाव की जिम्मेदारी सुरक्षा ग्रुप को सौंपी गई थी।

समाजसेवी और करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक प्रवीण भारतीय ने अंडरपास की हालत को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

प्रभावित हिस्से में बैरिकेडिंग का उद्देश्य किसी संभावित हादसे से बचाव करना है। मरम्मत के साथ क्षति के कारणों की तकनीकी जांच से रखरखाव की जरूरत स्पष्ट हो सकती है।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें