Waterlogging: ग्रेटर नोएडा में जलभराव खत्म करने की तैयारी तेज, नालों और ड्रेनेज नेटवर्क पर तेजी से काम

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Waterlogging: ग्रेटर नोएडा में जलभराव खत्म करने की तैयारी तेज, नालों और ड्रेनेज नेटवर्क पर तेजी से काम

ग्रेटर नोएडा में हर वर्ष बारिश के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्राधिकरण ने व्यापक स्तर पर काम तेज कर दिया है। जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर वहां नालों, आरसीसी नालियों और ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि इस मानसून में लोगों को राहत मिल सके।

प्राधिकरण ने सलाहकार एजेंसी की मदद से जल निकासी व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार लगभग एक माह पहले हुई बारिश के दौरान कई इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी थी, जिसके बाद परियोजना विभाग को सभी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

परियोजना विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तिलपता, सूरजपुर, कुलेसरा, हल्दौनी तथा 130 मीटर चौड़ी सड़क पर तिलपता गोलचक्कर से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रेलवे ओवरब्रिज तक लगभग एक किलोमीटर लंबा नाला बनाया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र इकोटेक-6 में आरसीसी नाली का निर्माण भी जारी है।

इसके अलावा टेकजोन-7, वैदपुरा गांव और तुस्याना गांव में जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई नालियां और सीसी सड़कें बनाई जा रही हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे लाइन तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के अंडरपासों में पंपसेट लगाए गए हैं, जिससे बारिश का पानी तेजी से निकाला जा सके।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी ने संबंधित अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान प्राथमिकता पर किया जा रहा है।

वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम को देखते हुए पिछले एक महीने से नालियों की सफाई अभियान लगातार चल रहा है। मंडी श्यामनगर में मुख्य मार्ग पर बनी कच्ची नाली को पक्का बनाने की तैयारी की जा रही है, जबकि देवटा मार्ग पर भी सीसी नाली निर्माण का कार्य जारी है।

पूर्व में हुए सर्वेक्षण में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 25 से अधिक जलभराव वाले स्थानों की पहचान की गई थी। इनमें अधिकांश स्थानों पर नालियों का निर्माण शुरू हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि नालों और तालाबों के ओवरफ्लो होने से गांवों में सड़कों पर पानी भरने की समस्या भी इन कार्यों के पूरा होने के बाद काफी हद तक कम होगी।

शाहबेरी, छपरौला, वैदपुरा, हिंडन पुल, तिलपता, सूरजपुर, नॉलेज पार्क-2, जगत फार्म, डेल्टा-2, घोड़ी बछेड़ा और बोड़ाकी सहित कई संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।