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उत्तर प्रदेश : हिंदू समाज की पराजय का कारण केवल फूट, भेदभाव मिटाना ही राष्ट्र की प्राथमिकता : मोहन भागवत

Mathura News : वृंदावन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और राष्ट्र निर्माण में ‘भक्ति’ की भूमिका पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संपूर्ण हिंदू समाज एक है और इसमें जाति, भाषा या पंथ के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव राष्ट्र के लिए घातक है।

भागवत जी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि हिंदू समाज कभी किसी शत्रु की वीरता या बल से नहीं हारा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब-जब हमारी पराजय हुई, उसका एकमात्र कारण आपसी फूट और भेदभाव था। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि केवल भाषणों और कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर, आचरण में बदलाव लाएं। हर हिंदू के घर में समाज के हर वर्ग के मित्र होने चाहिए और उनके बीच पारिवारिक संवाद व सहभोज होना चाहिए।

भक्ति को एक महान शक्ति बताते हुए सरसंघचालक ने कहा कि बिना भक्ति के ज्ञान ‘रावण’ के अहंकार जैसा हो जाता है और बिना भक्ति के कर्म ‘विक्षिप्त’ यानी पागलों जैसा हो जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक जड़ों में है, जिसने 500 वर्षों के विदेशी आक्रमणों के बाद भी सनातन धर्म को अक्षुण्ण रखा।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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