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UGC new rules protest: यूजीसी नियमों के विरोध में करणी सेना के नोएडा महानगर अध्यक्ष नजरबंद, सरकार को भेजा 10 सूत्रीय मांग पत्र

UGC new rules protest: यूजीसी नियमों के विरोध में करणी सेना के नोएडा महानगर अध्यक्ष नजरबंद, सरकार को भेजा 10 सूत्रीय मांग पत्र

नोएडा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में रविवार सुबह करणी सेना के नोएडा महानगर अध्यक्ष ठाकुर संग्राम सिंह चौहान को पुलिस ने उनके घर पर नजरबंद कर दिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब संगठन की ओर से नए यूजीसी नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही थी। पुलिस ने एहतियात के तौर पर सेक्टर-53 स्थित गिझौड़ में उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें और कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को घर से बाहर निकलने से रोक दिया।

करणी सेना के पदाधिकारियों का कहना है कि यूजीसी द्वारा लाए गए नए नियम छात्रों के हितों के खिलाफ हैं और इनका सीधा असर सवर्ण समाज के युवाओं पर पड़ेगा। संगठन का आरोप है कि इन नियमों से शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा होगा और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसी मुद्दे को लेकर करणी सेना ने पहले ही दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया था। संगठन के कार्यकर्ता लगातार इन नियमों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

नोएडा महानगर अध्यक्ष ठाकुर संग्राम सिंह चौहान ने कहा कि यूजीसी के नए नियम सवर्ण समाज के छात्रों के लिए घातक साबित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि इन नियमों के जरिए युवाओं को हतोत्साहित करने और उन्हें गलत रास्तों की ओर धकेलने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाती है तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

करणी सेना ने इस मामले में केंद्र सरकार को 10 सूत्रीय मांग पत्र भी भेजा है। संगठन की प्रमुख मांगों में यूजीसी रेगुलेशन-2026 को असंवैधानिक बताते हुए उसे पूरी तरह वापस लेने की मांग शामिल है। इसके अलावा सामान्य और अनारक्षित वर्ग को संवैधानिक व कानूनी संरक्षण देने, गजट अधिसूचना की सभी परिभाषाओं को स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ बनाने तथा इक्विटी समितियों में संतुलित, निष्पक्ष और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

संगठन ने यह भी मांग की है कि झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के मामलों में कठोर दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाएं, ताकि किसी भी छात्र या शिक्षक के साथ अन्याय न हो सके। साथ ही नई समीक्षा समिति में संगठन या समुदाय के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतुलित बन सके।

करणी सेना ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाले नियम बनाए जाने पर जोर दिया है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करे और समाज में संतुलन बनाए रखे। इसके अलावा असंवैधानिक गजट के निर्माण में जिम्मेदार व्यक्तियों की निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।

मांग पत्र में एंटी-रैगिंग एक्ट को दोबारा सख्ती से लागू करने और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने की भी बात कही गई है। संगठन का कहना है कि कई विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

ठाकुर संग्राम सिंह चौहान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो करणी सेना देशभर में अपना आंदोलन और तेज करेगी। उन्होंने कहा कि संगठन छात्रों के अधिकारों और समाज के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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