Begging Rehabilitation: भीख से मुक्ति की ओर 42 हजार कदम, 12,710 लोगों का पुनर्वास, सरकार का ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ पर जोर
नई दिल्ली, 17 अगस्त। भीख मांगने की मजबूरी से बाहर निकालकर लोगों को सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की स्माइल योजना के तहत देशभर में व्यापक स्तर पर पुनर्वास अभियान चलाया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की इस पहल के तहत अब तक 42,589 लोगों की पहचान और सर्वेक्षण किया गया है, जबकि 12,710 लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है। सरकार का उद्देश्य केवल लोगों को सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
स्माइल योजना की शुरुआत 12 फरवरी 2022 को की गई थी। इस योजना का व्यापक लक्ष्य ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ की दिशा में काम करना है। इसके तहत भीख मांगने की स्थिति में रह रहे लोगों की पहचान कर उनकी जरूरतों का आकलन किया जाता है और उसके बाद उन्हें उनकी परिस्थितियों के अनुसार पुनर्वास तथा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। योजना में चिकित्सा सुविधाओं से लेकर काउंसलिंग, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ने के अवसर तक विभिन्न स्तरों पर सहायता का प्रावधान किया गया है।
सरकार का जोर पुनर्वास की ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिससे लाभार्थियों को लंबे समय तक सहायता पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सके। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने को महत्वपूर्ण घटक बनाया गया है। जिन लोगों को प्रशिक्षण की जरूरत है, उन्हें उनकी क्षमता और रुचि के अनुसार कौशल विकास के अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए चिकित्सा सहायता और मानसिक तथा सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है।
स्माइल योजना के तहत समाज के अन्य हाशिए पर खड़े वर्गों के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विशेष रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 23 गरिमा गृह संचालित किए जा रहे हैं। इन गरिमा गृहों का उद्देश्य जरूरतमंद ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षित आवास, आवश्यक सेवाएं और पुनर्वास से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार पिछले तीन वर्षों में गरिमा गृहों के माध्यम से 1,041 ट्रांसजेंडर लोगों का पुनर्वास किया गया है। इन केंद्रों के जरिए ऐसे लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका से जुड़े अवसरों के माध्यम से उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्माइल योजना के अगले चरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन से मिली सिफारिशों को भी शामिल करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य अब तक लागू किए गए कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का आकलन कर आवश्यक सुधार करना और पुनर्वास व्यवस्था को अधिक परिणाम-केंद्रित बनाना है। इससे योजना के तहत मिलने वाली सहायता को जरूरतमंद लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
सरकार की इस पहल में भीख मांगने की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था या सामाजिक समस्या के रूप में देखने के बजाय इसके पीछे मौजूद आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कारणों पर ध्यान देने की कोशिश की जा रही है। पहचान और सर्वेक्षण के बाद लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार अलग-अलग सेवाओं से जोड़ने का मॉडल अपनाया गया है, ताकि पुनर्वास के बाद वे स्थायी रूप से सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ सकें।
42,589 लोगों की पहचान और 12,710 लोगों के पुनर्वास का आंकड़ा इस अभियान के व्यापक दायरे को दर्शाता है। आने वाले समय में योजना के अगले चरण और स्वतंत्र मूल्यांकन की सिफारिशों के आधार पर इसकी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने पर जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य ऐसे लोगों को सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़कर उन्हें भीख मांगने की मजबूरी से बाहर निकालना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।


