Sewerage System: ग्रेटर नोएडा के गांवों में बेहतर होगी सीवरेज व्यवस्था, पांच गांवों में बिछेगी नई लाइन
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के गांवों में सीवरेज व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में प्राधिकरण ने काम शुरू कर दिया है। जिन गांवों में पहले सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन वह मुख्य सीवर लाइन से नहीं जुड़ी है, वहां शेष काम पूरा कराया जाएगा। इसके तहत जुनपत, रिठौरी, अजायपुर, घोड़ी बछेड़ा और डाढा समेत पांच गांवों में बाकी बची सीवर लाइन बिछाने और उसे मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए निविदा जारी की गई है।
अधिकारियों के अनुसार निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले डेढ़ से दो महीने में इन गांवों में सीवर लाइन बिछाने और उसे मुख्य लाइन से जोड़ने का काम शुरू कराया जा सकता है। इस परियोजना पर करीब 2.33 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लाइन के मुख्य नेटवर्क से जुड़ने के बाद घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंच सकेगा।
प्राधिकरण की ओर से गांवों में घर-घर सीवर कनेक्शन देने का काम भी किया जा रहा है। सीवर विभाग के अनुसार ग्रेटर नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में ऐसे 34 गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां सीवर लाइन तो बिछी हुई है, लेकिन उसे मुख्य सीवर लाइन से नहीं जोड़ा गया है। कनेक्शन नहीं होने या लाइन के मुख्य नेटवर्क से नहीं जुड़ने के कारण कई जगह घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है।
सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव ने बताया कि गांवों में बची हुई सीवर लाइन बिछाने और उसे मुख्य लाइन से जोड़ने की योजना तैयार की गई है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में अधूरी पड़ी सीवर लाइन को भी पूरा करने का काम किया जा रहा है। इन कार्यों के पूरा होने के बाद सीवरेज व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
ग्रेटर नोएडा फेज-1 और फेज-2 को मिलाकर गांवों की संख्या 257 हो गई है। अधिसूचित क्षेत्र के गांवों में पंचायत चुनाव की व्यवस्था समाप्त होने के बाद मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्राधिकरण के स्तर पर है। इसी के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सीवरेज नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
प्राधिकरण ने सेक्टरों और गांवों के लिए सीवरेज से संबंधित अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की है। घरों से निकलने वाले सीवर के पानी को शोधित करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और संख्या बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में चार एसटीपी चालू हालत में हैं।
अधिकारियों के अनुसार शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने के लिए सीवरेज व्यवस्था के साथ साफ-सफाई और कचरे के शत-प्रतिशत निस्तारण समेत अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं। गांवों में सीवर लाइन उपलब्ध होने के बावजूद कनेक्शन नहीं लेने वाले लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
कई गांवों में किए गए सर्वेक्षण के दौरान सामने आया कि सीवर लाइन बिछी होने के बाद भी कुछ घरों ने अभी तक सीवर कनेक्शन नहीं लिया है। इसके कारण घरों का गंदा पानी नालियों और सड़कों पर बहता है। प्राधिकरण लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर सीवर कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से भी सीवर कनेक्शन और गंदे पानी के उचित निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
ग्रेटर नोएडा में वर्तमान में चार एसटीपी संचालित हैं। बादलपुर एसटीपी की क्षमता 2 एमएलडी, कासना एसटीपी की क्षमता 137 एमएलडी, इकोटेक-2 एसटीपी की क्षमता 15 एमएलडी और इकोटेक-3 एसटीपी की क्षमता 20 एमएलडी है।

