Satyawati Mishra Death: पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र की पत्नी सत्यवती मिश्र का निधन, नोएडा में 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
नोएडा। पूर्व राज्यपाल और भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की पत्नी सत्यवती मिश्र का 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नोएडा के मेट्रो अस्पताल में शनिवार देर रात अंतिम सांस ली। वह करीब एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं और फेफड़ों में संक्रमण के कारण उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से परिवार के साथ राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
कलराज मिश्र ने सोशल मीडिया के माध्यम से पत्नी के निधन की जानकारी साझा की। उन्होंने सत्यवती मिश्र की जीवन यात्रा पूर्ण होने की जानकारी देते हुए ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। निधन की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नेता तथा अन्य लोग नोएडा स्थित उनके आवास पर पहुंचने लगे।
सत्यवती मिश्र पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना कर रही थीं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें नोएडा के मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब एक सप्ताह तक चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चला। बताया गया कि उनके फेफड़ों में संक्रमण था। शनिवार देर रात करीब एक बजे उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर सामने आते ही कलराज मिश्र के परिवार और समर्थकों के बीच शोक का माहौल बन गया। राजनीतिक जगत से जुड़े कई नेताओं ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और सत्यवती मिश्र को श्रद्धांजलि दी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता नागेंद्रनाथ त्रिपाठी, नोएडा विधायक पंकज सिंह और गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा सहित कई लोग नोएडा स्थित आवास पहुंचे। नेताओं ने सत्यवती मिश्र के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
कलराज मिश्र लंबे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और केंद्र सरकार में मंत्री रहने के साथ विभिन्न संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनकी राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की लंबी यात्रा में सत्यवती मिश्र परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में उनके साथ रहीं।
परिजनों के अनुसार, सत्यवती मिश्र का अंतिम संस्कार रविवार को नोएडा के सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास स्थल पर किया गया। अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, राजनीतिक नेताओं और शुभचिंतकों ने शामिल होकर उन्हें अंतिम विदाई दी।


