Sakat Chauth 2026: आज सकट चौथ का व्रत, संतान सुख के लिए चंद्र दर्शन के बाद होगा पारण

Sakat Chauth 2026: आज सकट चौथ का व्रत, संतान सुख के लिए चंद्र दर्शन के बाद होगा पारण

नई दिल्ली। आज हिंदू धर्म में सकट चौथ का पावन व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, संकष्टी चतुर्थी और माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है और मान्यता है कि उनकी कृपा से संतान से जुड़े सभी कष्ट दूर होते हैं।

सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्र दर्शन तक निर्जल या फलाहार के साथ रखा जाता है। महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर शाम को चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है, इसलिए इस दिन चंद्र उदय का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को दूध, जल और तिल मिश्रित अर्घ्य देने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

पूजा विधि के अनुसार, सकट चौथ के दिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। शाम के समय भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उन्हें दूर्वा, मोदक, तिल के लड्डू और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद सकट चौथ की कथा सुनी जाती है और गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है। चंद्र उदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर संतान की मंगल कामना की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत करने से संतान को रोग, बाधा और संकट से रक्षा मिलती है। जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस कारण आज के दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और घरों में भक्तिभाव का वातावरण बना रहता है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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