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Peppermint Oil Study: पुदीने के तेल से 20 दिन में बीपी पर ब्रेक! छोटे क्लीनिकल ट्रायल में ऊपर वाला BP 8.5 और नीचे वाला 4.6 mmHg तक घटा

Peppermint Oil Study: पुदीने के तेल से 20 दिन में बीपी पर ब्रेक! छोटे क्लीनिकल ट्रायल में ऊपर वाला BP 8.5 और नीचे वाला 4.6 mmHg तक घटा

नई दिल्ली, 30 अगस्त। हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों के लिए पुदीने का तेल यानी पेपरमिंट ऑयल भविष्य में मददगार साबित हो सकता है। एक छोटे क्लीनिकल ट्रायल में पेपरमिंट ऑयल लेने वाले लोगों के ब्लड प्रेशर और आराम की स्थिति में हार्ट रेट में कमी देखी गई है। अध्ययन में महज 20 दिनों के भीतर सिस्टोलिक यानी ऊपर वाले ब्लड प्रेशर में प्लेसीबो की तुलना में औसतन करीब 8.5 एमएम एचजी की कमी दर्ज की गई। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती नतीजों के आधार पर पेपरमिंट ऑयल को हाई बीपी की नियमित दवाओं का विकल्प नहीं माना जा सकता।

वर्ष 2026 में किए गए इस रैंडमाइज्ड, प्लेसीबो-कंट्रोल्ड अध्ययन के नतीजे वैज्ञानिक पत्रिका ‘पीएलओएस वन’ में प्रकाशित हुए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लैंकाशायर के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में 18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के कुल 40 लोगों को शामिल किया गया था।

अध्ययन में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिन्हें प्री-हाइपरटेंशन या स्टेज-1 हाइपरटेंशन था। प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर पेपरमिंट ऑयल और प्लेसीबो के प्रभाव की तुलना की गई।

एक समूह के प्रतिभागियों को 20 दिनों तक सुबह और शाम 50-50 माइक्रोलिटर पेपरमिंट ऑयल पानी में मिलाकर दिया गया। दूसरे समूह को पेपरमिंट जैसा स्वाद देने वाला निष्क्रिय प्लेसीबो दिया गया, ताकि दोनों समूहों के परिणामों की तुलना की जा सके।

20 दिनों के बाद सामने आए परिणामों में पेपरमिंट ऑयल लेने वाले समूह में सिस्टोलिक यानी ऊपर वाला ब्लड प्रेशर प्लेसीबो समूह की तुलना में औसतन 8.48 एमएम एचजी कम पाया गया।

इसी तरह डायस्टोलिक यानी नीचे वाले ब्लड प्रेशर में भी अंतर दर्ज किया गया। पेपरमिंट ऑयल लेने वाले प्रतिभागियों का डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर प्लेसीबो की तुलना में औसतन करीब 4.57 एमएम एचजी कम पाया गया।

अध्ययन में केवल ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि आराम की स्थिति में दिल की धड़कन यानी रेस्टिंग हार्ट रेट में भी बदलाव देखा गया। पेपरमिंट ऑयल वाले समूह में रेस्टिंग हार्ट रेट प्लेसीबो की तुलना में करीब 8.92 बीट प्रति मिनट कम दर्ज किया गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक पेपरमिंट में पाया जाने वाला मेंथॉल इसके संभावित प्रभाव के पीछे एक कारण हो सकता है। माना जा रहा है कि मेंथॉल रक्त वाहिकाओं को फैलाने से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है, जिससे रक्त प्रवाह और ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है।

पेपरमिंट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स की संभावित भूमिका पर भी वैज्ञानिकों ने ध्यान दिया है। हालांकि इन तत्वों और ब्लड प्रेशर में दर्ज कमी के बीच वास्तविक जैविक प्रक्रिया को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।

शोध के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक दिखाई देने के बावजूद इसकी कई सीमाएं भी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन में केवल 40 लोगों को शामिल किया गया था और परीक्षण की अवधि महज 20 दिन थी।

इतने छोटे समूह और कम अवधि के आधार पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि पेपरमिंट ऑयल लंबे समय तक ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में कितना प्रभावी या सुरक्षित साबित होगा। अलग-अलग आयु वर्ग और स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों पर इसके प्रभाव को समझने के लिए बड़े स्तर पर अध्ययन जरूरी होंगे।

वैज्ञानिकों को यह भी जानना होगा कि लंबे समय तक पेपरमिंट ऑयल के सेवन से क्या प्रभाव पड़ते हैं, इसकी सुरक्षित मात्रा कितनी हो सकती है और पहले से ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले मरीजों में इसका क्या असर होता है।

इसलिए हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को इन शुरुआती नतीजों के आधार पर अपनी नियमित दवाओं में किसी तरह का बदलाव नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना बीपी की दवा बंद करना या उसके स्थान पर पेपरमिंट ऑयल लेना उचित नहीं है।

शोध के परिणाम फिलहाल पेपरमिंट ऑयल और ब्लड प्रेशर के बीच संभावित संबंध की ओर संकेत करते हैं। बड़े और लंबी अवधि वाले क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि भविष्य में इसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर के प्रबंधन में किसी सहायक उपाय के रूप में किया जा सकता है या नहीं।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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