Parthala Underpass: पर्थला चौराहे पर बनेगा 6 लेन अंडरपास, 80 करोड़ की परियोजना से जाम को मिलेगी बड़ी राहत
नोएडा। शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण यातायात जंक्शनों में शामिल पर्थला चौराहे पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बड़ी परियोजना तैयार की गई है। फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) कॉरिडोर पर पर्थला चौराहे के पास छह लेन का अंडरपास प्रस्तावित है। नोएडा प्राधिकरण ने वर्तमान के साथ भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना तैयार की है। परियोजना पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पर्थला चौराहा एफएनजी कॉरिडोर और विकास मार्ग के महत्वपूर्ण जंक्शन पर स्थित है। एफएनजी कॉरिडोर के जरिए गाजियाबाद, एनएच-9, मेरठ एक्सप्रेसवे, नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के बीच महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी मिलती है। भविष्य में इसके फरीदाबाद से जुड़ने के बाद इस मार्ग का महत्व और बढ़ने की उम्मीद है।
वर्तमान में इस मार्ग पर दिनभर बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में पर्थला चौराहे पर यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के आसपास तेजी से विकसित हो रहे आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के कारण आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए प्राधिकरण ने अंडरपास के जरिए एफएनजी कॉरिडोर पर वाहनों को निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
प्रस्तावित अंडरपास छह लेन का होगा। दोनों दिशाओं में वाहनों के लिए तीन-तीन लेन उपलब्ध कराई जाएंगी। अंडरपास की कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 710 मीटर होगी। परियोजना के डिजाइन में प्रत्येक दिशा में 110 मीटर लंबा आरसीसी बॉक्स और करीब 20 मीटर का खुला हिस्सा प्रस्तावित किया गया है।
इसके अलावा दोनों तरफ करीब 280-280 मीटर लंबे एप्रोच रोड बनाने की योजना है। इस तरह अंडरपास से गुजरने वाले वाहनों को मुख्य मार्ग से नीचे उतरने और दोबारा मुख्य सड़क पर आने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होगा। इससे यातायात की गति बनाए रखने और चौराहे पर वाहनों के ठहराव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अंडरपास में बारिश के दौरान जलभराव रोकने के लिए भी विशेष व्यवस्था प्रस्तावित है। वर्षा जल और अन्य रिसाव की निकासी के लिए दो सम्प बनाए जाएंगे। इसके साथ पंपिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा, जिससे पानी को तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा।
परियोजना के निर्माण में डायफ्राम वॉल तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसके साथ मौके पर आरसीसी निर्माण किया जाएगा। इस तकनीक का उद्देश्य निर्माण के दौरान आसपास की जमीन और पहले से मौजूद अवस्थापना की स्थिरता बनाए रखना है।
पूरी परियोजना की अनुमानित निर्माण लागत करीब 80 करोड़ रुपये बताई गई है। अंडरपास का निर्माण पूरा करने के लिए लगभग 18 महीने की अवधि प्रस्तावित की गई है। नोएडा प्राधिकरण परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
अंडरपास बनने के बाद एफएनजी कॉरिडोर पर चलने वाले वाहनों को पर्थला चौराहे पर रुकने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे चौराहे पर वाहनों का दबाव घटने के साथ यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
परियोजना का सीधा फायदा सेक्टर-66, सेक्टर-71, सेक्टर-121, सेक्टर-122, किसान चौक, छिजारसी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलने की उम्मीद है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गाजियाबाद की तरफ आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर हो सकेगी।
अंडरपास के निर्माण से यात्रा में लगने वाला समय कम होने, सड़क की यातायात क्षमता बढ़ने और जाम की समस्या में कमी आने की उम्मीद है। चौराहे पर अलग-अलग दिशाओं से आने वाले ट्रैफिक के टकराव में कमी आने से सड़क सुरक्षा में भी सुधार हो सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नोएडा प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना को शहर की यातायात अवस्थापना मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद पर्थला चौराहा और एफएनजी कॉरिडोर भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को संभालने के लिए अधिक सक्षम हो सकेंगे।





