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नौसेना कमांडरों का पहला सम्‍मेलन कल से शुरू हो रहा है

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नौसेना कमांडरों का पहला सम्‍मेलन कल से शुरू हो रहा है। यह सम्‍मेलन वर्चुअल और व्‍यक्तिगत दोनों रूप से होगा और इसका पहला चरण समुद्र में संपन्‍न होगा। तीन दिनों के इस सम्‍मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे।

रक्षा प्रमुख तथा भारतीय सेना और वायुसेना प्रमुख भी नौसेना कमांडरों के साथ चर्चा में शामिल होंगे तथा साझा राष्‍ट्रीय सुरक्षा वातावरण में तीनों सेनाओं की भूमिका पर चर्चा करेंगे। तीनों सेवाओं के बीच तालमेल बढ़ाने तथा राष्‍ट्र की रक्षा और राष्‍ट्रीय हितों के लिए तैयारी की रूपरेखा पर भी विचार किया जाएगा।

यह सम्‍मेलन समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नौसेना कमांडरों को सामरिक, संचालन और प्रशासन संबंधी मामलों पर चर्चा का मंच प्रदान करेगा।

Ranji Trophy 2023-2024: दिनेश कार्तिक को आया भयंकर गुस्सा, तमिलनाडु के कोच की लगाई जमकर क्लास

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रणजी ट्रॉफी 2023-2024 के सेमीफाइनल मुकाबले में मुंबई और तमिलनाडु की भिड़ंत हुई. तमिलनाडु पहली पारी में केवल 146 रन पर सिमट गई थी, वहीं मुंबई ने पहली पारी में 378 रन का बहुत बड़ा स्कोर खड़ा किया. शार्दुल ठाकुर के शतक और तनुष कोटियां की 89 रन की पारी की बदौलत मुंबई इतने बड़े स्कोर तक पहुंचने में सफल हो पाई. दूसरी ओर तमिलनाडु दूसरी पारी में भी मात्र 162 रन ही बना पाई. इसी के चलते मुंबई ने पारी और 70 रन के अंतर से जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश कर लिया है.

तमिलनाडु के कोच सुलक्षण कुलकर्णी ने टीम की हार का ठीकरा कप्तान साई किशोर पर फोड़ा था. उनका कहना था कि टीम पहले दिन की शुरुआत में ही मैच हार गई थी क्योंकि उन्हें टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करनी चाहिए थी. अब दिनेश कार्तिक ने टीम को सपोर्ट ना करने के लिए तमिलनाडू के कोच पर गुस्सा जताया है.

दिनेश कार्तिक का कोच पर फूटा गुस्सा

दिनेश कार्तिक ने सोशल मीडिया के जरिए तमिलनाडु के कोच द्वारा दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा, “यह बहुत गलत बात है. इस तरह की बातें कोच के मुंह से निकलना निराशनजाक है. एक कप्तान जो 7 साल बाद टीम को सेमीफाइनल तक लाया है, उसे समर्थन देने के बजाय इस तरह की बातें करना उन्हें शोभा नहीं देता. इस बात में कोई संदेह नहीं कि कोच ने खुद की जिम्मेदारी लिए बिना अपने कप्तान और पूरी टीम को हार का जिम्मेदार ठहरा दिया है.”

मैच में तमिलनाडु की हार को लेकर कोच सुलक्षण कुलकर्णी ने कहा था कि, “हम पहले दिन सुबह 9 बजे ही मैच हार चुके थे. हमें टॉस जीतने के बाद गेंदबाजी चुननी चाहिए थी, लेकिन कप्तान का प्लान कुछ और ही था. मैंने जैसे ही पिच को देखा तभी मुझे अंदाजा हो गया था कि हमें क्या करना होगा. मैं कोच हूं, मुंबई में रहा हूं और यहां की परिस्थितियों से वाकिफ हूं. मैं घोड़े को पानी तक ले जा सकता हूं लेकिन पानी को घोड़े तक नहीं ला सकता.”

एनआईए को सौंपी गई रामेश्वरम कैफे में हुए विस्फोट की जाँच

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गृह मंत्रालय ने बैंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में हुए विस्फोट की जांच राष्ट्रीय अन्‍वेषण अभिकरण- एनआईए को सौंप दी है। यह विस्फोट एक मार्च को बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में हुआ था और इसमें कई लोग घायल हुए थे।

यदि आप भी पॉपकॉर्न ब्रेन समस्या से नहीं जूझ रहे हैं, तो जानें इस समस्या का असली कारण।

Popcorn Brain Fever: टीवी देखते वक्त क्या आप भी हर मिनट पर चैनल बदल बदल कर देखने के आदी हो गए हैं. मोबाइल पर एक पेज पर फोकस नहीं कर पाते और दिमाग उछल उछल कर दूसरी चीजों की तरफ भागता है. आपका ब्रेन बच्चों की तरह बार बार दूसरी चीजों की तरफ भाग रहा है और आप फोकस नहीं कर पा रहे हैं तो आप यकीनन पॉपकॉर्न सिंड्रोम के शिकार हो रहे हैं. जी हां, दुनिया भर में  पॉपकॉर्न सिंड्रोम ब्रेन के शिकारों की संख्या बढ़ती जा रही है.

क्या होता हो पॉपकॉर्न सिंड्रोम 

ये एक तरह का सिंड्रोम है जिसमें दिमाग उछल उछल कर हर दूसरी तीसरी चीज को देखने के लिए भागता है. कोई भी बात या चीज उसकी उत्सुकता को शांत नहीं कर पाती और वो बस कुछ नया देखने और जानने के लिए इधऱ उधर भागता रहता है. ऐसे में दिमाग में धैर्य की कमी हो जाती है और दिमाग जरूरी चीजों पर फोकस कर पाने में नाकाम हो जाता है. चलिए जानते हैं कि पॉपकॉर्न ब्रेन आखिर क्या है और ये सेहत के लिए कैसे खतरनाक हो सकता है.

स्थिर नहीं रहता दिमाग 

रिसर्च कहती है कि जब  किसी व्यक्ति में अटेंशन स्पैन यानी ध्यान बनाए रखने का समय कम हो जाता है तो वो पॉपकॉर्न सिंड्रोम का शिकार माना जा सकता है. 2004 तक टीवी की स्क्रीन पर किसी चीज को देखने औऱ चैनल बदलने के लिए लोग ढाई मिनट खर्च करते थे. 2012 में ये स्पैन कम होकर सवा मिनट हो गया. फिलहाल वक्त में लोग मोबाइल या टीवी की स्क्रीन पर महज 47 सैकेंड तक ही टिक पाते हैं. यानी 47 सेकेंड बाद उनका दिमाग दूसरी चीज की तरफ मुड़ जाता है. पॉपकॉर्न की तरह उछलने वाला ये दिमाग हर सैकेंड पर बदल रहा है, वो एक से दूसरी चीज पर कूद रहा है और कुछ कर नहीं पा रहा है. यानी उसका फोकस और पेशेंस नदारद हो गया है. पॉपकॉर्न की तरह उछल उछल कर फोकस गंवाने वाले दिमाग को कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है.

पॉपकॉर्न सिंड्रोम के नुकसान 

हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि पॉपकॉर्न ब्रेन दिमाग में अस्थिरता पैदा कर रहा है. इससे जरूरी फोकस की कमी हो रही है और दिमाग अवसाद का शिकार हो रहा है. जब दिमाग किसी चीज पर टिक नहीं पाता है तो वो संतुष्ट नहीं हो पाता और इसकी वजह से वो दुखी और उछला महसूस करता है. पॉपकॉर्न ब्रेन की वजह लोगों के सीखने, याद करने और संवेदनाओं को महसूस करने की प्रवृत्ति पर गहरा असर पड़ रहा है. पॉपकॉर्न ब्रेन का असर दिमागी क्षमता पर भी पड़ रहा है क्योंकि इससे मेमोरी पर भी बुरा असर पड़ता है औऱ इंसान किसी विषय पर गहरी जानकारी लेने के लिए नाकामयाब रहता है.

ऐसे करें कंट्रोल

डॉक्टर कहते हैं कि दिमाग को कंट्रोल करने के लिए कई तरह की मेंटल एक्टिविटीज हैं और कुछ आदतें भी ऐसी हैं जिनके जरिए आप पॉपकॉर्न ब्रेन को कंट्रोल कर सकते हैं. अखबार पढ़ने की आदत डालिए. मोबाइल पर डिपेंडेंसी कम कीजिए. अपनी हॉबीज पर फोकस कीजिए और उसके लिए समय निकालिए. लोगों से मिलना जुलना बढ़ाइए. मेडिटेशन से भी आपको लाभ होगा. सप्ताह में कम से कम एक दिन के लिए डिजिटल डिटॉक्स कीजिए यानी मोबाइल से दूरी बनाइए.

सदन में भाषण या वोट देने के लिए सांसदों और विधायकों को रिश्वत लेने पर अब कानूनी कार्रवाई से छूट नहीः सर्वोच्‍च न्‍यायालय

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सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने फैसला दिया है कि सांसदों और विधायकों को विधानमंडल में भाषण या वोट देने के लिए रिश्‍वत लेने पर अब कानूनी कार्रवाई से छूट नहीं मिलेगी। मुख्‍य न्‍यायाधीश डी.वाई चंद्रचूड़ की अध्‍यक्षता वाली सात न्‍यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्‍मति से जेएमएम रिश्‍वत मामले में पांच न्‍यायाधीशों की पीठ के 1998 में दिए गए फैसले को खारिज कर दिया।

जेएमएम रिश्‍वत कांड में न्‍यायालय ने सांसदों और विधायकों को विधानमंडल में भाषण या वोट देने के लिए रिश्‍वत लेने पर कानूनी कार्रवाई से छूट देने का निर्णय दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि रिश्‍वतखोरी संसदीय विशेषाधिकारों द्वारा संरक्षित नहीं है और 1998 के फैसले की व्‍याख्‍या संविधान के अनुच्‍छेद 105 और 194 के विपरीत है।

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने कहा कि रिश्वतखोरी को संवैधानिक अनुच्‍छेदों के त‍हत छूट नहीं है, क्‍योंकि यह सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी को नष्‍ट करती है।

Punjab के इस जिले के लोग विदेशों में जमा रहे धाक, राजनीति में लहरा रहे परचम

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मालेरकोटला एक ऐसा जिला जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और घनिष्ठ समुदायों के लिए जाना जाता है। इतना ही नहीं इस जिले के लोगों ने कनाडा और अमेरिका के राजनीतिक क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य का सबसे युवा और सबसे छोटा जिला होने के बावजूद, मलेरकोटला के ऐसे कई गांव है, जहां के लोग उत्तरी अमेरिका के विभिन्न राज्यों में प्रतिष्ठित पदों पर तैनात है।

इन शख्सियतों में जंडाली कलां गांव के परिवार से संबंधित रूबी सहोता भी शामिल हैं, जो हाल ही में कनाडा के ब्रैम्पटन में हाउस ऑफ कॉमन्स में मुख्य सरकारी विप की भूमिका निभा रही हैं। रूबी सहोता हरबंस सिंह जंडाली और सुरिंदर कौर की बेटी है जिसने न सिर्फ संसद सदस्य के रूप में कार्य किया है, बल्कि संसदीय समितियों में भी सक्रिय रूप से योगदान दिया है।

इसी तरह, अमरजीत सिंह सोही की बनभौरा गांव में उनकी साधारण शुरुआत से लेकर एडमॉन्टन के मेयर के रूप में उनकी वर्तमान स्थिति तक की यात्रा दृढ़ता और दृढ़ संकल्प की भावना का उदाहरण देती है। एक ड्राइवर से लेकर संसद सदस्य बनने तक, सोही ने कनाडा सरकार में बुनियादी ढांचे, समुदायों और प्राकृतिक संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कनाडा सरकार में मुख्यमंत्री पद पर काम किया है। उनकी उपलब्धियां कड़ी मेहनत का प्रमाण हैं।

इस बीच, इंजीनियर अमर जिंदल के बेटे बॉबी पीयूष जिंदल की शानदार उपलब्धियों से गांव खानपुर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में लुइसियाना के गवर्नर के रूप में जिंदल का कार्यकाल न केवल उनके गांव के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। 2016 में राष्ट्रपति पद की दौड़ में उनके प्रवेश ने राजनीतिक मंच पर उनकी प्रमुखता को और अधिक रेखांकित किया, जिससे मालेरकोटला में उनकी जड़ों को विश्वव्यापी मान्यता मिली।

ये असाधारण सफलताएं मालेरकोटला के युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करती हैं, यह दर्शाती हैं कि समर्पण, दृढ़ता और उद्देश्य की मजबूत भावना के साथ, वे भी वैश्विक स्तर पर समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। जैसे-जैसे ये वंशज उत्तरी अमेरिका के राजनीतिक लैंडस्केप में अपना रास्ता बनाते जा रहे हैं, वे अपने साथ अपनी विरासत की आशाओं और आकांक्षाओं को भी लेकर चलते हैं, जो मलेरकोटला की शानदार विरासत की समृद्ध विरासत का प्रतीक हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डेफ-कनेक्‍टः2024 का किया उद्घाटन, कहा- रक्षा-उत्पादन क्षेत्र को बना रहे हैं आत्मनिर्भर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उभरती नई प्रौद्योगिकियों के मद्देनजर भारत को विकसित देश बनाने के लिए तकनीकी बढ़त हासिल करने पर जोर दिया है। उन्होंने देश को एक ज्ञानवान समाज में बदलने पर जोर दिया, जिसमें सरकार की बहुत बड़ी भूमिका है।

रक्षा मंत्री ने आज नई दिल्ली में डेफकनेक्ट 2024 का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार ने भारत को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे ले जाने के उद्देश्य से अदिति और आईडेक्स जैसी योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि अदिति योजना युवाओं में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देगी और देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे ले जाएगी।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार रक्षा उत्पादन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के हर कदम उठा रही है। श्री सिंह ने उल्लेख किया कि सरकार निरंतर सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी कर रही है। इसमें कुछ ऐसे प्रणालियां और उपकरण शामिल हैं, जिनका निर्माण देश में ही किया जाएगा।

यह कार्यक्रम रक्षा उत्पादन विभाग के तत्वावधान में इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस-डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (आईडेक्स-डीआईओ) द्वारा आयोजित किया गया है। आईडेक्स ढांचा सैन्य कर्मियों को सह-विकास मॉडल में नवप्रवर्तकों के साथ काम करने की अनुमति देता है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में शुरू किया था।

आईडेक्स, अनिवार्य रूप से रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न हितधारकों के लिए एकीकृत मंच प्रदान करता है। इस विशिष्ट क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास और संभावित सहयोग की निगरानी के लिए यह प्रमुख संगठन की तरह कार्य करता है।

भारत सरकार ने लॉन्च किया ‘चक्षु पोर्टल’, साइबर क्राइम करने वालों पर लगाई जाएगी लगाम

इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस जमाने में लोगों को जितने फायदे हुए हैं, उतने ही नुकसान का भी सामना करना पड़ा है. इंटरनेट के माध्यम से लोगों के कई काम आसान हो जाते हैं, लेकिन साइबर क्रिमिनल्स के लिए धोखाधड़ी करना भी काफी आसान हो जाता है. इस वजह से भारत सरकार ने साइबर क्राइम और क्रिमिनल्स पर लगाम लगाने के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है. इस पोर्टल का नाम “चक्षु” है. इस प्लेटफॉर्म पर भारत देश के सभी नागरिक साइबर फ्रॉड के बारे में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. आइए हम आपको सरकार के इस नए पोर्टल के बारे में बताते हैं.

ऑनलाइन स्कैम्स को रोकना उद्देश्य

सरकार की इस नई पहल का उद्देश्य सोशल मीडिया पर फैलने और फैलाए जाने वाले गलत, नकली, दुर्भावपूर्ण और धोखाधड़ी वाले मैसेजों को रोकना है. भारत सरकार की इस नई ऑनलाइन पोर्टल चक्षु के जरिए भारत के हरेक लोग किसी भी तरह की ऑनलाइन फ्रॉड या उनके पास फ्रॉड के लिए आए मैसेज, कॉल की शिकायत सीधे सरकार तक पहुंचा पाएंगे. सरकार सभी शिकायतों पर पैनी नज़र रखेगी और धोखेबाजों पर पर्याप्त कार्रवाई करेगी, ताकि देश में ऑनलाइन मीडियम से होने वाले घोटालों को कम किया जा सके.

किन बातों की शिकायत कर सकते हैं?

भारत सरकार के यह पोर्टल चक्षु को दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा संचालित आधिकारिक संचार साथी वेबसाइट पर उपलब्ध है. इस पोर्टल को व्हाट्सऐप (WhatsApp), एसएमएस (SMS) और कॉल पर फर्जी मैसेजों के कारण बढ़ती साइबर धोखाधड़ी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. चक्षु पोर्टल के जरिए लोग वित्तिय घोटाले (Financial Scams), फर्जी ग्राहक सहायता (Fake Consumer Support), नकली सरकारी अधिकारियों का रूप बनाकर कॉल मैसेज करने वाले, फर्ज़ी नौकरी (Fake Jobs) और लोन ऑफर (Loan Offers) से संबंधित सभी प्रकार के संदिग्ध कॉल, मैसेज या बातचीत की शिकायत कर सकते हैं.

PUBG और BGMI की कंपनी ने लॉन्च किया नया गेम Garuda Saga, पूरी तरह से भारतीय थीम पर है बेस्ड

पिछले कुछ सालों से भारत में बैटर रॉयल गेम का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा और फैला है. क्राफ्टन ने PUBG नाम का एक गेम लॉन्च किया था, जिसने भारत ने काफी  लोकप्रियता हासिल की थी. हालांकि, उस गेम को भारत में बैन कर दिया गया, जिसके बाद कंपनी ने भारत के लिए एक स्पेशल बैटल रॉयल गेम डेवलप किया, जिसका नाम BGMI यानी बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया है. इस गेम ने भी कुछ ही समय में युवाओं की लोकप्रियता हासिल कर ली.

बैटर रॉयल गेम्स की लिस्ट में आया गरुड़ सागा

इस वक्त भारत में बीजीएमआई जैसे और भी कई बैटर रॉयल गेम्स उपलब्ध हैं, जैसे Free Fire Max, Call of Duty, Genish Impact, New State Mobile जैसे कई गेम मौजूद हैं. इन्हीं के बीच अब एक और नया गेम शामिल हो चुका है, जिसका नाम गरुड़ सागा (Garuda Saga) है. इस गेम को क्राफ्टन इंडिया ने अलकेमिस्ट गेम्स के साथ मिलकर डेवलप किया है.  यह गेम पूरी तरह से भारतीय थीम पर आधारित है. इस गेम की पिक्चर्स देखकर आप समझ ही गए होंगे कि इसमें आम बैटल रॉयल गेम्स की तरह गोली, बंदूक, बारूद या बम का नहीं बल्कि धनुष-बाण का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी का कहना है कि इसे खासतौर पर भारत के गेमर्स के लिए डिजाइन किया गया है, इसलिए इसका गेमप्ले बाकी गेम्स से काफी अलग है.

धनुष-बाण से राक्षस पर हराना होगा लक्ष्य

यह गेम अब एंड्रॉयड और आईओएस पर डाउनलोड करने और खेलने के लिए उपलब्ध है. गरुड़ सागा खिलाड़ियों को उनकी पसंद के हिसाब से रोल प्लेइंग गेम का अनुभव प्रदान करता है, जिसे खेलने की उनकी खास स्टाइल के हिसाब से बनाया गया है. कंपनी ने प्रेस रिलीज में जानकारी दी है कि, “समृद्ध भारतीय थीम्स से प्रेरणा लेकर खिलाड़ी गरुड़ की भूमिका निभाते हैं. भरोसेमंद तीरों के वार और बेजोड़ रफ्तार के साथ गरुड़ एक के बाद एक लेवल पर आगे बढ़ता जाता है, और अंत में मॉन्सटर यानी राक्षस पर जीत हासिल करता है और हर जीत के साथ नई स्किल्स भी हासिल करता जाता है.

श्मशानघाट मां के फूल चुगने गए परिजनों के उड़े होश, डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप

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श्री मुक्तसर साहिब में दिल की बीमारी से पीड़ित एक महिला मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस महिला के अंतिम संस्कार के बाद उसके परिजनों ने कुछ  सामान सामने दिखाते हुए आरोप लगाया कि महिला के दाह संस्कार के बाद चिता में से कुछ डॉक्टरी सामान मिला तो उनके होश उड़ गए। परिवारजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि डॉक्टर ने आरोपों से इनकार किया है।

श्री मुक्तसर साहिब में एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने इलाज करने वाले डॉक्टर पर आरोप लगाया है। श्री मुक्तसर साहिब की रहने वाली बुजुर्ग महिला इंदरजीत कौर के परिजनों के मुताबिक उनकी मां को अचानक दौरा पड़ा और वे उन्हें अपनी माता को श्री मुक्तसर साहिब के एक निजी अस्पताल में ले गए।

मां के ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने एंजियोग्राफी और अन्य जरूरी जांच के बाद हार्ट में स्टेंट डाला। कुछ समय बाद मां की तबियत खराब हो गयी और मां की मृत्यु हो गयी। परिवार के मैंबरों ने माता की मृत्यु को भगवान की मर्जी समझी और अंतिम संस्कार कर दिया।

परिजनों ने बताया कि पिछले दिनों जब उन्होंने मां का संस्कार करने के बाद अगली  रस्म निभाते हुए फूल चुगने गए तो काफी सारा मेडिकल सामान मां की चिता में से मिला। इस उपरांत सब परेशान हो गए। परिजनों के अनुसार यह तारा आदि  संबंधित डॉक्टर द्वारा स्टंट डालते समय  अंदर ही छोड़ दिया जिस कारण माता की मौत हो गई।