Noida pollution: आफत बनता प्रदूषण, गैस चैंबर में तब्दील हुआ नोएडा, सांस लेना हुआ मुश्किल
नोएडा। लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने शहर को गैस चैंबर में बदल दिया है और लोगों की सांसों पर सीधा संकट खड़ा कर दिया है। रविवार को लगातार दूसरे दिन नोएडा देश का सबसे वायु प्रदूषित शहर रहा। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 466 दर्ज किया गया, जो गंभीर से भी बेहद खतरनाक श्रेणी में आता है। एक दिन पहले शनिवार को यह आंकड़ा 455 था, यानी 24 घंटे में प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया। पिछले चार वर्षों में यह नोएडा का सबसे खराब वायु गुणवत्ता स्तर है। इससे पहले 12 नवंबर 2021 को शहर का एक्यूआई 488 तक पहुंचा था।
प्रदूषण की मार सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं रही। ग्रेटर नोएडा की हवा भी गंभीर श्रेणी में बनी रही, जहां एक्यूआई 435 दर्ज किया गया। हालांकि यह पिछले दिन के मुकाबले कुछ कम रहा, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। सुबह से ही शहर में दृश्यता बेहद कम रही और 200 से 300 मीटर के बीच सिमट गई। दोपहर में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। धूप तक ठीक से नहीं निकल पाई और शाम ढलते ही प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया। हवा की रफ्तार बेहद कम रहने, कोहरे और धूलकणों के मिल जाने से प्रदूषित कण वातावरण में ही फंसे रहे और फैल नहीं सके। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को हवा की गति करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषण में थोड़ी राहत मिल सकती है।
वायु प्रदूषण का सबसे सीधा असर लोगों की सेहत पर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल में शनिवार और रविवार को सांस लेने में तकलीफ के चलते छह मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। इनमें से दो मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इन मरीजों की उम्र 40 से 60 वर्ष के बीच बताई गई है। इसके अलावा आपातकालीन विभाग में पिछले दो दिनों के भीतर सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित 16 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। शहर के चार बड़े निजी अस्पतालों में भी 25 से अधिक सांस के मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के आईसीयू प्रभारी डॉ. असद के अनुसार, सभी मरीज गंभीर हालत में अस्पताल लाए गए थे, हालांकि समय पर इलाज मिलने से अब उनकी स्थिति में सुधार है।
रात के समय प्रदूषण का स्तर और अधिक खतरनाक हो गया। रात 10 बजे से 12 बजे के बीच नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण चरम पर पहुंच गया। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क फाइव में पीएम-10 का स्तर 950 और पीएम-2.5 का स्तर 522 तक रिकॉर्ड किया गया। वहीं नोएडा के सेक्टर-116 में रात एक बजे पीएम-10 का स्तर 837 और पीएम-2.5 का स्तर 640 तक पहुंच गया। सेक्टर-1 में भी पीएम-10 का अधिकतम स्तर 722 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ग्रैप-4 के नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई भी की है। बोर्ड ने चार अलग-अलग स्थानों पर कुल दो करोड़ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सेक्टर-132 में ओरियन वन और ट्रियून ल्यूमिया ग्लोबल सोल्यूशन कंपनी पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना किया गया। इसके अलावा सेक्टर-127 में वैशाली फाइनेंशियल सर्विसेज और सेक्टर-132 में नोएडा इंफो सर्विसेज पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इन स्थानों पर निर्माण कार्य जारी था और भवन निर्माण सामग्री खुले में पड़ी हुई थी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में भी नोएडा शीर्ष पर रहा। नोएडा के बाद बहादुरगढ़ का एक्यूआई 464, दिल्ली का 461, गाजियाबाद का 459 और ग्रेटर नोएडा का 435 दर्ज किया गया। लगातार बिगड़ती हवा ने प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है और बिना जरूरी काम के घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।
