National Doctor Day: डॉक्टरी केवल पेशा नहीं, सेवा और समर्पण का संकल्प : डॉ. टंडन

National Doctor Day: डॉक्टरी केवल पेशा नहीं, सेवा और समर्पण का संकल्प : डॉ. टंडन
नई दिल्ली, 1 जुलाई : नेशनल डॉक्टर डे के अवसर पर देशभर में इस वर्ष ‘हील द हीलर्स’ थीम के साथ चिकित्सकों के योगदान को सम्मानित किया गया। इस मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डॉक्टरों की भूमिका को केवल इलाज तक सीमित न मानते हुए उन्हें समाज का संवेदनशील मार्गदर्शक बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि एक डॉक्टर केवल बीमारी का उपचार नहीं करता, बल्कि मरीज के विश्वास, उम्मीद और जीवन से जुड़ी जिम्मेदारियों को भी निभाता है। इसलिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाओं और करुणा का संतुलन ही एक बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की पहचान है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक प्रो. डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि डॉक्टर बनना केवल एक पेशा या आय अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता का संकल्प है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान, अनुभव और तकनीकी दक्षता जितनी आवश्यक है, उतनी ही महत्वपूर्ण करुणा, धैर्य, सहानुभूति और मरीज के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी है।
डॉ. टंडन ने कहा कि डॉक्टरों को कई बार बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सीमित समय के भीतर जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते हैं। ऐसे फैसलों का बाद में मूल्यांकन करना आसान होता है, लेकिन उस समय उपलब्ध परिस्थितियों, संसाधनों और मरीज की स्थिति को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने समाज से चिकित्सकों की कार्य परिस्थितियों को समझने और उनके प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की।

उधर, डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल की निदेशक डॉ. अखिलंदेश्वरी प्रसाद ने ‘हील द हीलर्स’ थीम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉक्टरों को भी अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को प्रकृति से जुड़ने, पर्याप्त विश्राम करने और स्वयं को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए समय निकालना चाहिए। जब तक डॉक्टर स्वयं स्वस्थ और ऊर्जावान नहीं होंगे, तब तक वे मरीजों को पूरी क्षमता के साथ बेहतर उपचार नहीं दे पाएंगे।
उन्होंने कहा कि लंबी ड्यूटी, लगातार तनाव, आपातकालीन परिस्थितियां और भावनात्मक दबाव के कारण कई बार डॉक्टर स्वयं की सेहत की अनदेखी कर देते हैं। ‘हील द हीलर्स’ की अवधारणा इसी सोच को बदलने का प्रयास है, ताकि डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और कार्यक्षमता को भी समान महत्व मिल सके।

वहीं, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की निदेशक डॉ. सरिता बेरी ने समाज से डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास, सम्मान और बेहतर संवाद स्थापित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब चिकित्सकों को सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण वातावरण मिलेगा, तब वे और अधिक समर्पण, आत्मविश्वास तथा संवेदनशीलता के साथ मरीजों की सेवा कर सकेंगे।
डॉ. सरिता बेरी ने कहा कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच मजबूत विश्वास का रिश्ता ही बेहतर उपचार और सकारात्मक स्वास्थ्य परिणामों की सबसे बड़ी आधारशिला है। नेशनल डॉक्टर डे पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समाज से डॉक्टरों के योगदान का सम्मान करने और उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।





