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नई दिल्ली: मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर हुआ तेज

नई दिल्ली: मौसम में बदलाव के साथ वायरल फीवर हुआ तेज
-खांसी, जुकाम, बुखार, गले में खराश से पीड़ित मरीजों को 5 से 8 दिन में मिल रहा आराम

नई दिल्ली, 31 जुलाई : राजधानी दिल्ली के मौसम में बदलाव के चलते वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। बदलते मौसम, गंदगी और हवा में नमी के कारण बुखार, खांसी-जुकाम, डायरिया, बदन दर्द और गले में खराश जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पतालों से लेकर तमाम अन्य अस्पतालों में इन दिनों वायरल फीवर के मामले चरम पर हैं।

दरअसल, दिल्ली में मानसून की आमद के साथ ही मौसम में तेजी से बदलाव आना शुरू हो गया है जिसके चलते वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, निमोनिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे रोग से पीड़ित मरीज घर -घर में दिखाई दे रहे हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए, मच्छरों से बचाव, स्वच्छ पेयजल और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। आरएमएल अस्पताल के इमरजेंसी चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. अमलेंदु यादव ने बताया कि मौसम में बदलाव के साथ अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां इमरजेंसी विभाग में रोजाना 1200- 1500 तक मरीज आ रहे हैं। जो सामान्य दिनों की अपेक्षा 20% ज्यादा हैं। इनमें वायरल फीवर और दूषित पानी से संबंधित मरीज ज्यादा हैं।

लोकनायक अस्पताल की इमरजेंसी विभाग की प्रभारी डॉ. ऋतु सक्सेना ने बताया कि यहां रोजाना 700 से 800 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं जिनमें वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया और डायरिया के मरीज शामिल हैं। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है जिसके चलते रोजाना 7 से 8 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के डॉ. संजय कुमार के मुताबिक हमारे यहां डायरिया के चलते 16 मरीज भर्ती हैं जिनका उपचार वार्ड में किया जा रहा है। इसके अलावा ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में भी 20% से 25% तक इजाफा हुआ है। यहां रोजाना 12700 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ये सभी वायरल बुखार,खांसी-जुकाम, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड से पीड़ित हैं।

सफदरजंग अस्पताल के मुताबिक ओपीडी में 10 से 12 हजार मरीज रोज इलाज कराने आते हैं लेकिन इन दिनों वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हो रहा है। इमरजेंसी विभाग में 1200 से 1300 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं जिनमें डायरिया, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज शामिल हैं। संजय गांधी स्मारक अस्पताल के आपातकालीन विभाग की सीएमओ डॉ. बीना ने बताया कि बारिश के मौसम में वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के मरीजों के साथ अन्य मरीज भी पहुंच रहे हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में जहरीले कीड़े मकौड़ों और सांपों के काटने के शिकार मरीज शामिल हैं। साथ ही फूड पॉइजनिंग और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसे संक्रामक रोग से पीड़ित मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। गुरुतेग बहादुर अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. कुलदीप कुमार ने बताया कि इमरजेंसी में रोजाना 1100 से 1200 मरीज आते हैं जो इन दिनों 1450 से ज्यादा प्रतिदिन हो गए हैं। ये सभी वायरल फीवर, टाइफाइड, निमोनिया और मलेरिया जैसे रोगों से पीड़ित पाए जा रहे हैं।

कैसे करें बचाव ?
सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर जुगलकिशोर ने बताया कि बरसात के मौसम में कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। इनमें डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, वायरल बुखार और लेप्टोस्पायरोसिस के साथ त्वचा और आंख का संक्रमण प्रमुख हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए, मच्छरों से बचाव, स्वच्छ पेयजल और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। बारिश में भीग जाने के बाद शरीर को तौलिया से तुरंत सुखा लें। एसी में न रहें इन दिनों वायरल बुखार का संक्रमण जोरों पर है। इसमें रोगी को तेज बुखार होता है। कुछ मरीजों के शरीर का तापमान 102 डिग्री या उससे भी ज्यादा बना रह सकता है। ऐसे में मरीज के माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रखकर तापमान कम करने का प्रयास करें। कटे फल, बाजार का खाना और फ्रिज में रखा बासी खाना ना खाएं। उमस भरे मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और रखे हुए भोजन को खराब कर देते हैं जिससे डायरिया, डिसेंट्री (मल में खून आना), टाइफाइड के मामले कई गुना बढ़ जाते हैं। खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से साफ करें। डॉक्टर की सलाह से दवा लें।

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