Mobile Stroke Unit India:  अब स्ट्रोक पीड़ित के घर पहुंचेगा अस्पताल

Mobile Stroke Unit India:  अब स्ट्रोक पीड़ित के घर पहुंचेगा अस्पताल

नई दिल्ली/असम, 22 जनवरी 2026: स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारी में हर मिनट कीमती होता है। इलाज में देरी होने पर मस्तिष्क की करोड़ों कोशिकाएं नष्ट हो सकती हैं, जिससे मौत या लंबे समय तक विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (MSU) सौंपी हैं। इन मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों को मिनटों में जीवनरक्षक इलाज मिल सकेगा।

ICMR के महानिदेशक एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने बताया कि भारत दुनिया का दूसरा देश है, जो ग्रामीण और कठिन भौगोलिक इलाकों में आपातकालीन सेवाओं के साथ मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को सफलतापूर्वक जोड़ रहा है। इससे तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के मरीजों का इलाज ‘गोल्डन आवर’ यानी बीमारी के शुरुआती महत्वपूर्ण घंटों के भीतर किया जा सकेगा। इससे स्ट्रोक के चलते होने वाली मौतों और लंबे समय तक विकलांगता में कमी लाई जा सकेगी।

मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को ‘चलता-फिरता अस्पताल’ कहा जाता है। इस यूनिट में सीटी स्कैन मशीन, विशेषज्ञ डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा और पॉइंट-ऑफ-केयर लैब टेस्ट मौजूद रहते हैं। इसके अलावा, क्लॉट-बस्टिंग दवाएं (थक्का घोलने वाली दवाएं) भी उपलब्ध हैं, जो स्ट्रोक के शुरुआती इलाज के लिए जरूरी होती हैं। इन सुविधाओं से अब मरीजों को अस्पताल पहुंचने तक की देरी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

इस पहल से असम के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक मरीजों को तेजी से और प्रभावी इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा और स्ट्रोक से उत्पन्न दीर्घकालिक विकलांगता में भी कमी आएगी।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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