Mathura : मथुरा के बेसिक शिक्षा विभाग में प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाने के नाम पर मनमाने तबादलों का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि बीएसए ने हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में नियमों को ताक पर रखकर चहेते शिक्षकों को मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दे दी। मामला जिलाधिकारी और सीडीओ तक पहुंचा तो करीब 150 शिक्षकों के पदस्थापना आदेश निरस्त कर दिए गए। सीडीओ ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है।
दरअसल बीएसए रतन कीर्ति ने 26 सितंबर और 22 अक्टूबर को प्रभारी प्रधानाध्यापकों की तैनाती के आदेश जारी किए थे। आरोप है कि इन आदेशों में न तो शिक्षकों की वरिष्ठता का ध्यान रखा गया और न ही छात्र-शिक्षक अनुपात यानी पीटीआर के मानकों का पालन किया गया।
आरोप तो यहां तक हैं कि पति-पत्नी को एक ही विद्यालय में तैनाती दे दी गई और एआरपी को गलत विद्यालय दर्शाकर प्रभारी बना दिया गया। शिक्षकों की मनमानी अदला-बदली से कुछ विद्यालय बंद होने की स्थिति में पहुंच गए तो कुछ एकल शिक्षक वाले रह गए।
शिकायत जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह और मुख्य विकास अधिकारी तक पहुंची। मामला संदिग्ध मिलने पर सीडीओ ने आदेश निरस्त कर जांच कमेटी बना दी। हालांकि इस पूरे मामले में अभी कई सवाल बाकी हैं। आरोप है कि जारी सूचियों के अलावा व्यक्तिगत आदेशों के जरिए भी शिक्षकों को मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी गई। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है। देखना होगा कि इस पूरे खेल में कौन-कौन जिम्मेदार पाया जाता है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।





