Kochi Hit and Run Case: जज के नाबालिग बेटे से जुड़े हादसे में पुलिस कमिश्नर का तबादला, 4 पुलिसकर्मी निलंबित
केरल के कोच्चि में मर्सिडीज-बेंज कार की टक्कर से 55 वर्षीय स्कूटर सवार की मौत के मामले ने गंभीर विवाद का रूप ले लिया है। हादसे की शुरुआती जांच और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद केरल सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को कोच्चि के पुलिस कमिश्नर कलिराज महेश कुमार का तबादला कर दिया। साथ ही, जांच में कथित लापरवाही के आरोप में चेरानेल्लूर पुलिस स्टेशन से जुड़े चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। हादसे में जिस मर्सिडीज-बेंज कार के शामिल होने की बात उजागर हुई है, उसे कथित तौर पर एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था। मृतक के परिवार ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मामले के संबंध में बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने पुलिस अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक, कलिराज महेश कुमार की जगह आईपीएस अधिकारी आर. निशांतिनी को कोच्चि शहर का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया जा चुका है। निशांतिनी वर्ष 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और इससे पहले दक्षिण क्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक के पद पर कार्यरत थीं। वहीं, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पी. प्रकाश को दक्षिण क्षेत्र का पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। उनके पास राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। यह प्रशासनिक बदलाव उस प्रारंभिक जांच के बाद किया गया, जिसमें हादसे से जुड़े मामले को संभालने के तरीके और आरोपों के निर्धारण के संबंध में पुलिस की भूमिका पर प्रश्न खड़े किए गए थे। अधिकारियों की रिपोर्ट में शुरुआती पड़ताल के दौरान गंभीर चूक की बात उजागर होने के बाद उच्च स्तर पर कार्रवाई की गई।
इस प्रकरण में निलंबित किए गए चार पुलिसकर्मियों में स्टेशन हाउस ऑफिसर एवं सब-इंस्पेक्टर विश्वजीत वीएस, सर्किल इंस्पेक्टर स्याम कुमार केएस, ग्रेड असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर मनोज केटी और सीनियर सिविल पुलिस ऑफिसर अरुण जोशी शामिल हैं। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विधानसभा में इन पुलिसकर्मियों के निलंबन की जानकारी दी थी। उन्होंने मामले की शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही होने की बात कही थी। हादसे के बाद पुलिस टीम ने पहले जिस तरह मामला दर्ज किया और जिस आधार पर आरोपी नाबालिग को राहत मिली, उसे लेकर मृतक के परिजनों ने आपत्ति जताई थी। इसके पश्चात वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने वारदात स्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार से बातचीत कर मामले की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई।
यह हादसा 25 अक्टूबर की तड़के कोच्चि के चेरानेल्लूर इलाके में हुआ था। मृतक की पहचान 55 वर्षीय जयबालकृष्णन के रूप में हुई है, जो मनजली के निवासी थे और चित्तूर के पास सड़क किनारे खाने-पीने की दुकान चलाते थे। बताया गया कि वह रात में दुकान बंद करने के बाद अपने स्कूटर से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कंटेनर रोड पर मरापरम्बु के पास पीछे से आ रही मर्सिडीज-बेंज ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी। हादसे में वह बुरी तरह घायल हो गए और उनकी जान चली गई। शुरुआती जांच में कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने के संकेत मिले। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, वाहन में मौजूद वीडियो फुटेज में भी कार की तेज रफ्तार दिखाई देने की बात उजागर हुई है। बहरहाल, दुर्घटना की पूरी परिस्थितियों और जिम्मेदारी का आखिरी निर्धारण जांच के निष्कर्षों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना है।
मामले में विवाद उस समय बढ़ा, जब पुलिस टीम ने शुरुआत में लापरवाही की वजह से मौत से जुड़े हुए कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया। बाद में पड़ताल के दौरान तेज रफ्तार और हादसे की परिस्थितियों के मद्देनजर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 भी जोड़ी गई, जो गैर-इरादतन हत्या से जुड़े हुए है। मृतक के परिजनों का आरोप था कि शुरुआती कार्रवाई में संगीन आरोपों को शामिल नहीं किया गया और मामले को उचित गंभीरता से नहीं संभाला गया। परिवार ने पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग की। विरोध और वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा के बाद मामले में आरोपों की समीक्षा की गई और जांच की दिशा में बदलाव किए गए। पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के संबंध में उठे सवाल ही कमिश्नर के तबादले और चार पुलिसकर्मियों के निलंबन की मुख्य वजह बने।
हादसे में कथित तौर पर कार चला रहे 17 वर्षीय किशोर को घटना के बाद हिरासत में लिया गया था और फिर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जमानत मिल गई। इस फैसले और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर पीड़ित परिवार ने प्रश्न खड़े किए। बाद में पुलिस टीम ने किशोर की जमानत रद्द कराने के उद्देश्य से अदालत का रुख किया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पी. विजयन के मुताबिक, इस सिलसिले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। शुरुआती पुलिस रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि हादसे के समय किशोर शराब के नशे में नहीं था, जबकि उसके रक्त के नमूने आगे की जांच के उद्देश्य से लिए गए थे। इस पहलू पर आखिरी निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा। किशोर की उम्र के मद्देनजर मामले में किशोर न्याय कानून के प्रावधान भी लागू होते हैं।
जांच का दायरा वाहन के मालिक तक भी पहुंचा है। मर्सिडीज-बेंज अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के नाम पर पंजीकृत बताई गई है, जबकि दुर्घटना के समय उसे उनका नाबालिग बेटा चला रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, किशोर के पिता को भी मोटर वाहन अधिनियम के जुड़े हुए प्रावधानों के तहत मामले में आरोपी बनाया गया है। इन प्रावधानों के तहत नाबालिग द्वारा वाहन चलाने की स्थिति में वाहन के पंजीकृत मालिक या अभिभावक की जिम्मेदारी की जांच की जा सकती है। इस प्रकरण में पुलिस टीम ने जुड़े हुए साक्ष्यों और परिस्थितियों की पड़ताल शुरू की है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का आखिरी निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
मामले की संवेदनशीलता के मद्देनजर जांच को जिला अपराध शाखा को सौंपे जाने की भी खबर है। पुलिस अधिकारी वारदात स्थल, सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दुर्घटना के बाद पुलिस टीम ने किस आधार पर शुरुआती धाराएं लगाईं, नाबालिग को किस प्रक्रिया के तहत राहत मिली और क्या पड़ताल के दौरान किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ। मृतक के परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। वहीं, राज्य सरकार ने पुलिसकर्मियों के निलंबन और कमिश्नर के तबादले को मामले में उठाए गए प्रशासनिक कदमों के रूप में देखा जा रहा है। अब आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि हादसे में किन लोगों की क्या कानूनी जिम्मेदारी बनती है और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में हुई कथित चूकों के उद्देश्य से कौन जिम्मेदार है।





