Delhi Pitampura Firing: दिल्ली के पीतमपुरा में साहिल जैन उर्फ गूगल के घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग, CCTV में कैद हुए बाइक सवार दो हमलावर; लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कनेक्शन की जांच
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बेखौफ बदमाशों की गोलीबारी की घटना उजागर हुई है। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की सुबह दो अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने कारोबारी साहिल जैन उर्फ गूगल के घर के बाहर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। हमलावरों ने मकान की दीवारों और बाहर खड़ी कार को निशाना बनाया। शुरुआती मिली जानकारी के मुताबिक, लगभग छह राउंड फायरिंग की गई। राहत की बात यह रही कि इस वारदात में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। पुलिस अब फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के कोशिश में जुटी है।
यह घटना सुभाष प्लेस थाना क्षेत्र के लोक विहार ए-ब्लॉक में सुबह लगभग पांच बजे हुई। उस समय इलाके में सामान्य गतिविधियां शुरू ही हो रही थीं। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध व्यक्ति साहिल जैन के आवास के पास पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देता है कि बाइक चला रहे व्यक्ति ने हेलमेट पहन रखा था, जबकि पीछे बैठे व्यक्ति ने कपड़े से अपना चेहरा ढका हुआ था। दोनों कुछ देर के उद्देश्य से मकान के सामने रुके और उनमें से एक व्यक्ति बाइक से उतरकर फायरिंग करने लगा।
हमलावर ने मकान की ओर निशाना साधते हुए कई गोलियां चलाईं। इसके पश्चात बाहर पार्किंग में खड़ी कार पर भी फायरिंग की गई। गोलियां चलाने के बाद दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से वहां से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस को वारदात की सूचना दी गई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस टीम वारदात स्थल पर पहुंची और नजदीकी क्षेत्र की जांच शुरू की।
प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान पुलिस को पार्किंग में खड़ी कार पर गोलियों के तीन निशान मिले। इसके साथ ही सामने स्थित मकान पर भी चार से पांच गोलियों के निशान दिखाई देने की जानकारी मिली है। वारदात स्थल से एक जिंदा कारतूस और दो खाली खोखे जब्त किए गए। पुलिस टीम ने इन साक्ष्यों को कब्जे में लेकर आगे की जांच आरंभ कर दी है। क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के विशेषज्ञों ने भी वारदात स्थल का निरीक्षण किया, जिससे गोलीबारी से जुड़े हुए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा सकें।
इस वारदात में जिस साहिल जैन उर्फ गूगल के घर को निशाना बनाया गया, उनका नाम पहले भी अलग-अलग विवादों और आपराधिक आरोपों से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आ चुका है। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें सट्टेबाजी से जुड़े बड़े कारोबारी के रूप में जानकारी दी गई है। उनके खिलाफ अवैध कॉल सेंटर के कारोबार से जुड़े हुए आरोपों का भी उल्लेख मिलता है। बहरहाल, इन आरोपों को वर्तमान गोलीबारी के मामले में उनकी किसी आपराधिक जिम्मेदारी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। पुलिस वर्तमान में इस पहलू की जांच में जुटी है कि हमलावरों ने खास तौर पर उनके घर को ही क्यों निशाना बनाया।
इस गोलीबारी के बाद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े एक पुराने कथित धमकी भरे फोन कॉल का मामला भी चर्चा में आ गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2021 में साहिल जैन को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई की ओर से धमकी मिली थी। उस समय एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई थी, जिसमें साहिल जैन और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने का दावा किया गया था। इस कथित धमकी से जुड़े हुए मामला वर्ष 2023 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में दर्ज किया गया था।
अब पुलिस इस पुराने घटनाक्रम को भी वर्तमान गोलीबारी की पड़ताल के दौरान ध्यान में रख रही है। जांच अधिकारियों के सामने महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बुधवार सुबह हुई फायरिंग का संबंध उसी पुरानी धमकी से है या किसी अन्य आपराधिक समूह ने साहिल जैन को निशाना बनाया है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है, लेकिन अब तक किसी गिरोह की संलिप्तता की अधिकारियों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
पुलिस इस संभावना की भी पड़ताल में जुटी है कि गोलीबारी का उद्देश्य रंगदारी मांगना या कारोबारी को डराना होने की संभावना है। बहरहाल, अभी तक सामने आई जानकारी में किसी हालिया रंगदारी मांग या नए धमकी भरे संदेश की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में घटना को सीधे किसी विशेष गैंग या रंगदारी की साजिश से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली की पुलिस उपायुक्त आकांक्षा यादव ने कहा कि साहिल जैन को वर्ष 2021 में धमकी मिलने की जानकारी पुलिस के संज्ञान में है, लेकिन उसके बाद किसी नई धमकी की सूचना सामने नहीं आई थी। उन्होंने इसके साथ स्पष्ट किया कि बुधवार की गोलीबारी की जिम्मेदारी अब तक किसी व्यक्ति या आपराधिक गिरोह ने नहीं ली है। पुलिस अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटा रही है और घटना के पीछे की असल वजह का जानने का कोशिश में जुटी है।
पुलिस उपायुक्त के मुताबिक, हमलावरों की पहचान के उद्देश्य से विशेष टीमें गठित की जा चुकी हैं। पुलिस सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच में जुटी है और आरोपियों के वारदात स्थल तक पहुंचने तथा वहां से भागने के रास्तों का पता लगाया जा रहा है। नजदीकी मार्गों और मुख्य चौराहों पर लगे कैमरों की फुटेज भी जांच के उद्देश्य से महत्वपूर्ण हो सकती है। अधिकारियों का प्रयास है कि बाइक सवार दोनों संदिग्धों की गतिविधियों की पूरी कड़ी तैयार की जा सके।
जांच में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भी अहम भूमिका होगी। वारदात स्थल से बरामद कारतूस और खाली खोखों के आधार पर इस्तेमाल किए गए हथियार के सिलसिले में तकनीकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ ही कार और मकान पर मिले गोलियों के निशानों की जांच से गोलीबारी की दिशा तथा घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। पुलिस इन सभी पहलुओं पर काम में जुटी है।
दिल्ली में किसी आवासीय इलाके में सुबह के समय इस प्रकार गोलीबारी होना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर घटना है। भले ही इस हमले में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन मकान और वाहन को निशाना बनाकर की गई फायरिंग ने नजदीकी लोगों की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के उद्देश्य से अब सबसे बड़ी चुनौती हमलावरों की जल्द पहचान करना और यह पता लगाना है कि उन्हें इस वारदात को अंजाम देने के उद्देश्य से किसने और क्यों भेजा।
इस प्रकरण में पुरानी धमकी, संभावित रंगदारी, व्यक्तिगत विवाद और किसी संगठित आपराधिक गिरोह की भूमिका जैसे अलग-अलग पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस के दावे के मुताबिक, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में किसी आरोपी की गिरफ्तारी या किसी गैंग की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि साहिल जैन उर्फ गूगल के घर पर गोलीबारी के पीछे असल मकसद क्या था।





