Indigenous Waterjet System: स्वदेशी वॉटरजेट प्रणाली का पहला परीक्षण सफल, भारतीय तटरक्षक के 14 फास्ट पेट्रोल वेसल्स में लगेंगे मेड इन इंडिया सिस्टम

Indigenous Waterjet System: स्वदेशी वॉटरजेट प्रणाली का पहला परीक्षण सफल, भारतीय तटरक्षक के 14 फास्ट पेट्रोल वेसल्स में लगेंगे मेड इन इंडिया सिस्टम

नई दिल्ली, 15 जुलाई। समुद्री रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। गोवा स्थित एमजेपी इंडिया में विकसित स्वदेशी मरीन जेट पावर (एमजेपी) वॉटरजेट प्रणाली के पहले फैक्टरी एक्सेप्टेंस ट्रायल (एफएटी) सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। इस उपलब्धि के साथ पहली बार भारतीय तटरक्षक (इंडियन कोस्ट गार्ड) के 14 फास्ट पेट्रोल वेसल्स (एफपीवी) में पूरी तरह स्वदेश में विकसित मरीन जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगाए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

यह परीक्षण भारतीय तटरक्षक, वर्गीकरण संस्था तथा मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। परीक्षण के सफल रहने के बाद इस अत्याधुनिक प्रणाली को भारतीय तटरक्षक के नए फास्ट पेट्रोल वेसल्स में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अब तक इस प्रकार की उन्नत मरीन जेट प्रोपल्शन तकनीक के लिए भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। स्वदेशी प्रणाली के सफल विकास और परीक्षण से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों के विकास को भी नई गति मिलेगी। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी वॉटरजेट प्रणाली के उपयोग से जहाजों का रखरखाव अधिक आसान और किफायती होगा। इसके साथ ही स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता बेहतर होगी, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनेगी और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होने से परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।

भारतीय तटरक्षक के फास्ट पेट्रोल वेसल्स समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में तैनात रहते हैं। ऐसे में स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम इन जहाजों की गति, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तकनीक के सफल परीक्षण से भविष्य में भारतीय नौसेना और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के जहाजों में भी स्वदेशी मरीन जेट प्रोपल्शन सिस्टम के उपयोग का मार्ग खुल सकता है। इससे देश में रक्षा उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को भी नई मजबूती मिलेगी।

सरकार लगातार रक्षा उपकरणों और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के स्वदेशीकरण पर जोर दे रही है। मरीन जेट पावर वॉटरजेट प्रणाली का सफल परीक्षण इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो भारत को समुद्री रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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