Health Ministry: महामारी से निपटने की तैयारी तेज, बीमारी निगरानी व्यवस्था होगी और मजबूत
देश में भविष्य में आने वाली महामारियों और उभरते स्वास्थ्य खतरों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बीमारी निगरानी (डिजीज सर्विलांस) प्रणाली को सशक्त बनाने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी संक्रामक रोग या स्वास्थ्य आपात स्थिति की समय रहते पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जा सके। इसके लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर एक नई रणनीति पर काम शुरू किया गया है।
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी के लिए एक नए की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) फ्रेमवर्क को अपनाने पर सर्वसम्मति बनी। इस नई व्यवस्था के तहत अब हर महीने राज्यों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी, जिससे कमियों की समय रहते पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केवल बीमारियों का इलाज ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय रहते उनकी पहचान, निगरानी और रोकथाम भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से बीमारी निगरानी प्रणाली को आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और राज्यों के बेहतर समन्वय के साथ और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
बैठक में वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण को विशेष प्राथमिकता दी गई। इस अवधारणा के तहत मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानते हुए समग्र रणनीति तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की कई महामारियां पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रमणों के कारण उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए वन हेल्थ मॉडल को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
समीक्षा बैठक के दौरान एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध, रेबीज नियंत्रण, लेप्टोस्पायरोसिस, सर्पदंश (Snakebite), जलवायु परिवर्तन से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों तथा इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इन सभी क्षेत्रों में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और डेटा साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्र सरकार का कहना है कि नई निगरानी प्रणाली के माध्यम से रोगों की पहचान पहले से अधिक तेज़ी से की जा सकेगी। इससे किसी भी संभावित महामारी या संक्रामक बीमारी के फैलने से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। इसके साथ ही राज्यों को समय-समय पर तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और निगरानी संबंधी दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि डेटा आधारित निर्णय, आधुनिक तकनीक का उपयोग, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और नियमित मासिक समीक्षा से देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पहले की तुलना में अधिक मजबूत, संवेदनशील और जवाबदेह बनेगी। इससे न केवल महामारी प्रबंधन में सुधार होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि कोविड-19 महामारी से मिले अनुभवों के आधार पर स्वास्थ्य व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करना समय की आवश्यकता है। इसी दिशा में यह नई पहल देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने और किसी भी संभावित स्वास्थ्य संकट का प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
