Noida Authority: 5% आबादी भूखंड की फाइल लौटाने पर किसानों का प्रदर्शन, तीन दिन में समाधान का आश्वासन
नोएडा में 5 प्रतिशत आबादी भूखंड से जुड़ी फाइल बार-बार आपत्तियां लगाकर वापस किए जाने से नाराज किसानों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में किसान सेक्टर-19 स्थित नोएडा प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। किसानों ने वर्क सर्किल-8 में तैनात अधिकारियों पर उनकी पत्रावली को अलग-अलग टिप्पणियों के साथ बार-बार वापस करने का आरोप लगाया और मामले का जल्द समाधान कराने की मांग की।
मामला गेझा तिलपताबाद निवासी बृजपाल और जयवीर की 5 प्रतिशत आबादी भूखंड से संबंधित पत्रावली का है। किसानों के अनुसार, इस पत्रावली में खसरा संख्या 574/1, 548, 248, 284, 602 और 682 समेत एक दर्जन से अधिक खसरा नंबर शामिल हैं। किसानों का कहना है कि भूलेख विभाग से जांच के बाद पत्रावली को वर्क सर्किल-8 भेजा गया था। संबंधित खसरा नंबरों पर अतिक्रमण नहीं होने की रिपोर्ट भी दी गई थी।
किसानों के मुताबिक, इसके बावजूद संबंधित खसरा नंबरों से जुड़ी रिपोर्ट दोबारा मांगी गई और फाइल को वापस भूलेख विभाग भेज दिया गया। किसानों का कहना है कि भूलेख विभाग ने 17 सितंबर को अलग से रिपोर्ट भेज दी थी। इसके बाद भी 28 सितंबर को उनकी मूल पत्रावली दोबारा वापस कर दी गई। इसी को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने सोमवार को प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि एक ही मामले में बार-बार नई आपत्तियां लगाकर फाइल को लंबित किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण उन्हें अपने काम के लिए बार-बार प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों ने अपनी शिकायत में रिश्वत के तौर पर भारी रकम मांगने का आरोप भी लगाया। हालांकि, यह आरोप किसानों की ओर से लगाए गए हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर प्राधिकरण के अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और उनकी शिकायत तथा फाइल से जुड़ी समस्याओं को सुना। बातचीत के बाद अधिकारियों की ओर से किसानों को उनकी समस्या का तीन दिन के भीतर समाधान कराने का आश्वासन दिया गया।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। भारतीय किसान परिषद की ओर से कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसान दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल किसानों को प्राधिकरण के आश्वासन के बाद तीन दिन में समाधान का इंतजार है।


