Delhi: कड़ाके की ठंड में मरीजों और तीमारदारों को राहत, अस्पतालों के बाहर टेंट में मिला सुरक्षित आश्रय

Delhi: कड़ाके की ठंड में मरीजों और तीमारदारों को राहत, अस्पतालों के बाहर टेंट में मिला सुरक्षित आश्रय

नई दिल्ली, 18 जनवरी। दिल्ली की कड़ाके की ठंड में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर राजधानी पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए बड़ी राहत की व्यवस्था की गई है। एम्स, सफदरजंग, डॉ. राम मनोहर लोहिया और लेडी हार्डिंग जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों के आसपास अस्थायी नाइट शेल्टर टेंट लगाए गए हैं, जहां ठंड से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को रात गुजारने का सुरक्षित स्थान मिल रहा है। यह व्यवस्था दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा की गई है।

सर्द मौसम के बावजूद इलाज की आस में दिल्ली आने वाले कई मरीज और उनके परिजन अस्पतालों के बाहर खुले में रात बिताने को मजबूर थे। उत्तर प्रदेश से आए बुजुर्ग दंपत्ति लालिया खान और उनके पति जाहिद अली इसका उदाहरण हैं। शुक्रवार रात करीब नौ बजे दोनों एम्स के पास दिल्ली मेट्रो सब-वे में ठहरने की जगह तलाशते नजर आए। लालिया ने उसी दिन एमआरआई जांच करवाई थी, जबकि दिल के मरीज जाहिद अली रूटीन चेक-अप के लिए दिल्ली आए थे। कंबल और मेडिकल रिपोर्ट से भरे बैग के साथ वे ठंडे फर्श पर रात बिताने की तैयारी कर ही रहे थे कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर के पास बनाए गए अस्थायी शेल्टर में जाने की सलाह दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह व्यवस्था दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया आदेश के तहत की जा रही है। अदालत ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिए थे कि प्रमुख अस्पतालों के आसपास मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्थायी रात्रि विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, क्योंकि स्थायी रैन बसेरे पहले से ही पूरी तरह भरे हुए हैं। इस बार सर्दी असाधारण रूप से कठोर रही है। बीते गुरुवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो जनवरी 2023 के बाद सबसे कम दर्ज किया गया। ऐसे हालात में खुले में सो रहे मरीजों और उनके तीमारदारों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई थी।

हाई कोर्ट ने इस मामले में एम्स, सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और आरएमएल अस्पताल को पक्षकार बनाते हुए 15 जनवरी को सभी संबंधित विभागों और अस्पताल प्रशासन के साथ बैठक करवाई। बैठक में अल्पकालिक योजना तैयार की गई, जिसके तहत सफदरजंग अस्पताल परिसर के पास खाली जमीन पर 70 से 80 पगोडा या अस्थायी शेल्टर लगाने का प्रस्ताव रखा गया। प्रत्येक शेल्टर में 20 से 25 लोगों के ठहरने की क्षमता तय की गई है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों को राहत मिल सके।

एम्स ट्रॉमा सेंटर के पास लगाए गए टेंटों में डूसिब की ओर से फोम शीट बिछाई गई है, जिससे ठंड से कुछ हद तक बचाव हो सके। लालिया और जाहिद सहित करीब 15 लोग एक ही टेंट में ठहरे नजर आए। वहीं आरएमएल अस्पताल में अब भी कई परिवार स्ट्रेचर के नीचे या संगमरमर की बेंचों पर रात गुजारते दिखे। 25 दिसंबर से अपने छह महीने के बच्चे के आईसीयू में भर्ती होने के कारण अस्पताल में रुकी 19 वर्षीय खुशी ठाकुर ने बताया कि बच्चे के इलाज के लिए उन्हें हर हाल में वहीं रुकना पड़ता है और ठंड में व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

आरएमएल अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अस्पताल के आसपास भी अस्थायी टेंट लगाए जा रहे हैं। अब तक नौ टेंट तैयार किए जा चुके हैं और बाकी जल्द लगाए जाएंगे। फिलहाल रोजाना दर्जनों मरीज और उनके तीमारदार इन टेंटों में ठंड से राहत पा रहे हैं, हालांकि जमीनी स्तर पर सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत अब भी महसूस की जा रही है। यह पहल कड़ाके की ठंड में इलाज के लिए आए जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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