Cyclone Arnab: बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव, 23-24 सितंबर को तट से टकराने की संभावना; कई राज्यों में भारी बारिश
बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल चुका है और इसके अगले 24 घंटों में डीप डिप्रेशन बनने की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तट को पार कर सकता है। इसके प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।
मौसम विभाग के 21 सितंबर शाम 5:30 बजे के अपडेट के मुताबिक, सिस्टम पश्चिम-मध्य और उससे लगे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर करीब 17.7 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 87.8 डिग्री पूर्वी देशांतर पर केंद्रित था। यह पुरी से लगभग 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, गोपालपुर से करीब 310 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, कलिंगपट्टनम से करीब 390 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और विशाखापत्तनम से लगभग 470 किलोमीटर पूर्व में स्थित था।
IMD के अनुसार, इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और अगले 24 घंटे में डीप डिप्रेशन में तब्दील होने की काफी संभावना है। इसके बाद 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट को पार करने का अनुमान है। इस दौरान समुद्र और तटीय इलाकों में तेज हवाएं चल सकती हैं।
इस मौसम प्रणाली को लेकर ‘अर्नब’ नाम की भी चर्चा हो रही है। यदि यह सिस्टम आगे चलकर चक्रवाती तूफान में विकसित होता है तो इसका नाम अर्नब रखा जाएगा। यह नाम बांग्लादेश की ओर से सुझाया गया है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में इसे आधिकारिक रूप से चक्रवाती तूफान कहना जल्दबाजी होगी। अभी मौसम विभाग की निगरानी मुख्य रूप से इसके डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन के रूप में आगे बढ़ने पर है।
सबसे ज्यादा असर ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों में देखने को मिल सकता है। 23 और 24 सितंबर को तटीय आंध्र प्रदेश तथा यनम में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। 24 सितंबर को ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। सिस्टम के तट पार करने के बाद बारिश का प्रभाव धीरे-धीरे आंतरिक हिस्सों की ओर बढ़ने का अनुमान है।
ओडिशा में लगातार बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रापड़ा, गंजाम, खुर्दा, कटक, गजपति, रायगढ़ा, कंधमाल, कालाहांडी, नबरंगपुर, बोलांगीर, ढेंकनाल, अंगुल, नयागढ़ और नुआपाड़ा समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बताई गई है। आने वाले दिनों में बारिश का क्षेत्र ओडिशा के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों की तरफ बढ़ सकता है।
लगातार बारिश की स्थिति में महानदी, ब्राह्मणी, सुवर्णरेखा और बुढ़ाबलंगा जैसी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने का खतरा रहेगा। स्थानीय स्तर पर निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन प्रभावित होने की स्थिति भी बन सकती है। प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आंध्र प्रदेश में भी 23 और 24 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ समुद्री परिस्थितियां खराब रहने की संभावना है। इसी वजह से मछुआरों और समुद्र से जुड़े लोगों को मौसम विभाग के आगामी अपडेट पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
इस सिस्टम का असर ओडिशा और आंध्र प्रदेश तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। इसके आगे बढ़ने के साथ छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश बढ़ सकती है। मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ और मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
झारखंड में 25 सितंबर तक कई इलाकों में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। तेज हवाओं की गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना भी जताई गई है। बारिश के कारण राज्य के तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। वहीं बिहार में 24 से 26 सितंबर के बीच बारिश बढ़ सकती है। मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ इसके प्रभाव का दायरा और स्पष्ट होगा। मौसम विभाग का कहना है कि 22 सितंबर के बाद सिस्टम की दिशा और गति को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम तेजी से संगठित हो रहा है और इसके 23-24 सितंबर के बीच दक्षिणी ओडिशा तथा उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट के आसपास पहुंचने का अनुमान है। इसके चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना पर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अगले कुछ दिनों के IMD अपडेट इस मौसम प्रणाली की वास्तविक तीव्रता और इसके प्रभाव वाले क्षेत्रों को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।


