CJP Protest Case: नोएडा मजिस्ट्रेट पर CJI सूर्यकांत सख्त, बोले- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई
नोएडा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को मामले का उल्लेख होने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नोएडा के संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट छात्र विरोध प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर रद्द करने और भविष्य में छात्रों के खिलाफ जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दे चुका है, तब छात्र को इस तरह का नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की गई।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मौखिक रूप से यह मामला उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी कर पूछा था कि शांति बनाए रखने के लिए उससे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार क्यों न लिए जाएं।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि बाद में संबंधित नोटिस वापस ले लिया गया। इस पर CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का उल्लेख करते हुए मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि छात्रों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई का प्रभाव केवल एक छात्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका संदेश देशभर के विद्यार्थियों तक जाएगा। उन्होंने इसे अदालत के आदेश की अवमानना से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि पहले कार्रवाई करना और बाद में उसे वापस लेना पर्याप्त नहीं है।
भट्टाचार्य ने कहा कि नोएडा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा नहीं कर सकते। इस पर CJI सूर्यकांत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जिला मजिस्ट्रेट से इस संबंध में जवाब मांगा जाएगा।
यह पूरा मामला गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में BA-LLB की पढ़ाई कर रहे अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। अक्षत प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं।
चार सितंबर 2026 को नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आर.के. सिसोदिया के कार्यालय की ओर से अक्षत त्रिपाठी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस में आरोप लगाया गया था कि अक्षत विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे और छात्रों के बीच सरकार विरोधी तथा कथित रूप से भ्रामक सूचनाएं प्रसारित कर रहे थे। नोटिस में आशंका जताई गई थी कि ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद क्यों न किया जाए। इसके लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने की शर्त रखने की बात कही गई थी। मामले में सुनवाई के लिए पांच सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी।
हालांकि नोटिस जारी होने के अगले दिन इसे वापस ले लिया गया। इसके बाद अक्षत त्रिपाठी ने मंगलवार को एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उन्हें धमकाने का प्रयास किया जा रहा है।
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। CJI की टिप्पणी के बाद संबंधित कार्रवाई को लेकर जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगे जाने की बात कही गई है। मामले में आगे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।


