Ayurveda Global Summit: आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता दिलाने की तैयारी: भारत मंडपम में जुटेंगे 110 देश, अश्वगंधा पर होगा विशेष वैज्ञानिक सत्र

Ayurveda Global Summit: आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता दिलाने की तैयारी: भारत मंडपम में जुटेंगे 110 देश, अश्वगंधा पर होगा विशेष वैज्ञानिक सत्र

नई दिल्ली, विश्व स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करने और आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत पहचान दिलाने के उद्देश्य से भारत 17 से 19 दिसंबर तक भारत मंडपम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दूसरे वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस सम्मेलन में दुनिया के 110 देशों के प्रतिनिधि और 20 देशों के स्वास्थ्य मंत्री भाग लेंगे। समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उपस्थित होकर भारत के आयुष मॉडल को विश्व के समक्ष साझा करेंगे।

इस बार सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्रबिंदु अश्वगंधा होगा—एक ऐसी औषधीय जड़ी-बूटी जो सदियों से भारतीय चिकित्सा प्रणाली का मूल हिस्सा रही है और आज वैश्विक बाजार में तेजी से पहचान बना रही है। अश्वगंधा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न संदेहों और भ्रांतियों को मिटाने के लिए सम्मेलन में विशेष वैज्ञानिक सत्र आयोजित किया जाएगा, जहाँ शोधकर्ता इसके प्रमाणित औषधीय गुणों को वैज्ञानिक अध्ययन और डेटा के आधार पर प्रस्तुत करेंगे।

सम्मेलन की थीम
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘संतुलन बहाली: विज्ञान और स्वास्थ्य कल्याण से जुड़ी आदतें’ निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योग प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाकर पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के बीच पुल बनाने का काम करेगा।

जाधव ने कहा—
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी प्रणालियाँ आज विश्वभर में विश्वास और वैज्ञानिकता का प्रतीक बन चुकी हैं।”

अश्वगंधा के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
आयुष मंत्रालय ने जानकारी दी कि भारत अश्वगंधा उत्पादन में विश्व में सबसे आगे है और सरकार इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक योजनाएं लागू कर रही है। वैश्विक वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किए जाने से इस जड़ी-बूटी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विश्वसनीयता और मांग दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

वैश्विक डिजिटल लाइब्रेरी बनेगी आकर्षण का केंद्र
आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली पर आधारित वैश्विक डिजिटल लाइब्रेरी को भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें 16 लाख से अधिक शोध प्रकाशन उपलब्ध होंगे, जिनमें से 70,000 से अधिक भारत से जुड़े अध्ययन हैं। शोधकर्ताओं के लिए यह लाइब्रेरी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि का बयान
डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा का भविष्य वैज्ञानिक प्रमाणों और नवाचार पर आधारित है। उन्होंने कहा—
“यह समिट पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए अगले दशक की वैश्विक रणनीति तय करेगा।”

सम्मेलन में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश, आयुष उप महानिदेशक सत्यजीत पॉल तथा पीआईबी के प्रधान महानिदेशक धीरेन्द्र ओझा भी उपस्थित रहे।

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