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AI in medical education: मेडिकल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करेगा एम्स, भविष्य के डॉक्टरों को डिजिटल कौशल से लैस करने की पहल

AIIMS Delhi workshop

AI in medical education: मेडिकल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करेगा एम्स, भविष्य के डॉक्टरों को डिजिटल कौशल से लैस करने की पहल

नई दिल्ली, 22 फरवरी। स्वास्थ्य सेवाओं, जैव-चिकित्सा अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका को देखते हुए एम्स दिल्ली ने अपने चिकित्सा पाठ्यक्रम में एआई को शामिल करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य भावी स्वास्थ्य पेशेवरों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के अनुरूप ज्ञान और कौशल से लैस करना है, ताकि वे बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

यह संकेत एम्स दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यशाला के समापन अवसर पर सामने आया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि एआई आधारित उपकरण अब रोग निदान, क्लीनिकल वर्कफ्लो और स्वास्थ्य प्रणाली प्रबंधन को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में मेडिकल छात्रों के लिए इन तकनीकों का समुचित उपयोग, उनकी सीमाओं की समझ और नैतिक मानकों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना आवश्यक हो गया है।

कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सकों, पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञों, एआई विशेषज्ञों, कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षा नीति निर्माताओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि स्नातक स्तर पर एआई के बुनियादी सिद्धांतों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई शिक्षा के साथ डेटा गोपनीयता, नैतिकता, नियामक ढांचे और जिम्मेदार उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को सुरक्षित, मानव-केंद्रित और समानता आधारित बनाने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों में एआई साक्षरता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में एआई आधारित पाठ्यक्रम लागू करने के लिए चरणबद्ध रोडमैप तैयार करने, फैकल्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने, साझा शैक्षणिक संसाधन विकसित करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाने की सिफारिश की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की मेडिकल शिक्षा प्रणाली को भविष्य की डिजिटल स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम साबित होगी।

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संवाददाता

Tirthankar Sarkar

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