SC ST Reserved Seats Rotation: SC-ST आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के रोटेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों में अनिवार्य रोटेशन की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। बुधवार की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को बताया कि इस तरह का नीतिगत निर्णय संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। याचिकाकर्ता जगदीश सिंह उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट के मतदाता हैं। उनका कहना था कि सीट लगभग सात दशक से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और आरक्षण के नियमित रोटेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने के अवसरों और समानता से जुड़े प्रश्न उठाए गए। पंचायतों और नगर निकायों की तर्ज पर संसदीय तथा विधानसभा क्षेत्रों में भी आरक्षण के रोटेशन की मांग रखी गई।
न्यायमूर्ति बागची ने सुनवाई में बहुदलीय लोकतंत्र, राजनीतिक दलों को ध्यान में रखते हुए मतदान और गैर-आरक्षित क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के विकल्प पर टिप्पणी की। पीठ ने किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र से ही चुनाव लड़ने के दावे और व्यापक संवैधानिक व्यवस्था के बीच अंतर बताया।
मुख्य न्यायाधीश ने हल्के अंदाज में कहा कि याचिकाकर्ता ने 'गलत नंबर' मिलाया है और अपनी मांग जनप्रतिनिधियों के सामने रख सकते हैं। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्णय में दखल नहीं दिया जिसमें परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(c) को बरकरार रखा गया था।
इस प्रावधान में संबंधित आबादी के अनुपात को ध्यान में रखते हुए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण की व्यवस्था है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट पहले मुद्दे पर विचार कर चुका है और नीतिगत बदलाव के लिए संसद उपयुक्त मंच है। याचिकाकर्ता को सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से अपनी मांग रखने का विकल्प बताया गया।
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