Gurukul Kurukshetra राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना समारोह में की शिरकत, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान को किया नमन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित 114वें स्थापना वर्ष समारोह और स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को संरक्षित रखने के साथ-साथ भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी के महान व्यक्तित्व, त्याग, तपस्या और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को नमन किया। साथ ही भारतीय संस्कृति और वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के योगदान की सराहना की।
समारोह में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र का भविष्य युवा पीढ़ी के संस्कारों और सामर्थ्य से बनता है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल के इस पवित्र प्रांगण में इतिहास की प्रेरणा, वर्तमान का गौरव और भविष्य का संकल्प एक साथ दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन हरियाणा के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि प्रदेश अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर हीरक जयंती मना रहा है। इसी अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान शताब्दी वर्ष तथा गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 114वां स्थापना समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए गुरुकुल परिवार को स्थापना दिवस और प्रदेशवासियों को हरियाणा दिवस एवं हीरक जयंती की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत और अभिनंदन करते हुए कहा कि ज्ञान और संस्कार के इस तीर्थ में राष्ट्रपति की उपस्थिति शिक्षा के महत्व को और अधिक रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल जैसी संस्थाएं विद्यार्थियों में केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती हैं।
स्वामी श्रद्धानंद जी के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने गुलाम भारत में लोगों के भीतर स्वाभिमान जगाने, सामाजिक सुधार की चेतना पैदा करने और देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित करने का काम किया। महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरित होकर स्वामी श्रद्धानंद जी ने ज्ञान, चरित्र और सेवा के आधार पर सशक्त समाज के निर्माण का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वामी जी समझते थे कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के संस्कारों और सामर्थ्य पर निर्भर करता है। इसी सोच के साथ उन्होंने ऐसी शिक्षा व्यवस्था का संकल्प लिया, जो विद्यार्थियों को ज्ञानवान, अनुशासित, साहसी, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बनाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके आदर्श समाज को अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग रहने की प्रेरणा देते हैं। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि शिक्षा का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए और प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा एवं संस्कार प्राप्त करने का अवसर मिले।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र की स्थापना और इसकी शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1912 में स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा स्थापित यह संस्थान उनकी दूरदृष्टि की जीवंत धरोहर है। यहां भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने गुरुकुल की यात्रा में योगदान देने वाले आचार्यों, प्रबंधकों, सहयोगियों और पूर्व विद्यार्थियों का अभिनंदन किया। साथ ही गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के गुरुकुल के प्रति समर्पण और संस्कारयुक्त शिक्षा के प्रसार के प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने आचार्य देवव्रत द्वारा प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आचार्य देवव्रत 180 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जहां किसी भी प्रकार के कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। मुख्यमंत्री ने इसे प्राकृतिक खेती और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का प्रयास बताया।
समारोह के दौरान गुरुकुल के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और शारीरिक शिक्षा पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने मलखंभ, सूर्य नमस्कार और व्यायाम के माध्यम से अपनी प्रतिभा, अनुशासन और शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों के जरिए उन्होंने भारतीय पारंपरिक शारीरिक शिक्षा और जीवनशैली की झलक पेश की।
विद्यार्थियों ने स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन, संघर्ष, सामाजिक सुधार के कार्यों, राष्ट्रभक्ति और बलिदान पर आधारित विशेष प्रस्तुति भी दी। इसमें उनके प्रेरणादायक जीवन और आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्वामी श्रद्धानंद जी के विचारों और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया।



