दिल्ली में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिमांशु भाऊ गिरोह से जुड़े दो कथित सदस्यों को गिरफ्तारी की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुरसलीन उर्फ गुल्लू और नवीन के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों पर गिरोह के उद्देश्य से जबरन वसूली, हत्या और शूटरों को मदद पहुंचाने जैसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि आरोपी गिरोह के सदस्यों के उद्देश्य से आर्थिक लेनदेन और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्थाएं संभालते थे। पुलिस इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की इसकी पड़ताल में जुटी है। जुड़े हुए अधिकारियों की जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार मुरसलीन उर्फ गुल्लू की उम्र करीब 25 वर्ष है और वह गाजियाबाद के लोनी इलाके का निवासी है, जबकि 29 वर्षीय नवीन हरियाणा के भिवानी का रहने वाला है। जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि कुछ युवक हिमांशु भाऊ गिरोह के शूटरों को लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। इसके पश्चात स्पेशल सेल की टीम ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी और खुफिया जानकारी को आधार बनाकर कदम उठाए। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग कथित तौर पर फरार शूटरों के ठहरने, पैसों की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम करते थे, जिससे वे अपनी गतिविधियां जारी रख सकें।
पड़ताल के दौरान पुलिस ने मुरसलीन उर्फ गुल्लू को 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। उसके पास से एक पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में उसने बताया कि जनवरी 2026 में विशाखापत्तनम में उसकी मुलाकात गिरोह के दो कथित शार्पशूटरों से हुई थी। उस समय दोनों दिल्ली में आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद वहां छिपे हुए थे। पुलिस का ऐसा आरोप उजागर हुआ है कि इसके पश्चात मुरसलीन गिरोह के उद्देश्य से काम करने लगा और शूटरों तक पैसे पहुंचाने के साथ-साथ होटल में ठहरने के उद्देश्य से फर्जी पहचान पत्रों की व्यवस्था करने में भी मदद करने लगा।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2026 में गिरोह के कथित शार्पशूटरों की गिरफ्तारी के बाद हिमांशु भाऊ ने मुरसलीन को शूटर के तौर पर तैयार करना शुरू किया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसे हथियार भी उपलब्ध कराए गए थे और वह कथित तौर पर किसी लक्षित हत्या को अंजाम देने या उससे पहले रेकी करने के निर्देश मिलने का इंतजार कर रहा था। इसके बावजूद, इस कथित साजिश और आरोपी की भूमिका से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक कार्यवाही की प्रक्रिया के दौरान होनी बाकी है।
मुरसलीन से पूछताछ को आधार बनाकर पुलिस ने नवीन को भी गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने जो विवरण साझा किया, उसके अनुसार, नवीन को गिरोह से जुड़े उन्हीं कथित शूटरों के माध्यम से नेटवर्क में शामिल किया गया था। शुरुआत में वह अपने बैंक खाते के जरिए गिरोह से जुड़े लोगों तक पैसे पहुंचाने में मदद करता था। इसके बाद उस पर हथियार एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि नवीन भी इंटरनेट आधारित सुरक्षित संचार ऐप के माध्यम से गिरोह के सदस्यों के संपर्क में था। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि कथित नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं और इसका इस्तेमाल किन-किन आपराधिक गतिविधियों के उद्देश्य से किया जा रहा था।
पुलिस अधिकारियों ने जो विवरण साझा किया, उसके अनुसार, पूछताछ से गिरोह की आर्थिक और लॉजिस्टिक व्यवस्था से जुड़ी अहम जानकारियां मिली हैं। जांच में यह भी जानने का प्रयास की जा रही है कि विदेश में मौजूद बताए जाने वाले गिरोह के सरगना और भारत में सक्रिय उसके सहयोगियों के बीच किस तरह संपर्क स्थापित किया जाता था। पुलिस का ऐसा आरोप उजागर हुआ है कि संगठित गिरोह अपने नेटवर्क के जरिए युवाओं को आपराधिक गतिविधियों में शामिल करते हैं और उन्हें हथियार, आर्थिक सहायता तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इस प्रकरण में जांच एजेंसियां कथित वित्तीय लेनदेन, हथियारों की आपूर्ति और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
हिमांशु भाऊ गिरोह का नाम दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में दर्ज कई गंभीर आपराधिक मामलों की पड़ताल के दौरान सामने आता रहा है। पुलिस विभिन्न मामलों में गिरोह से जुड़े संदिग्धों की भूमिका की इसकी पड़ताल में जुटी है। ताजा कार्रवाई के बाद भी जांच कार्यवाही की प्रक्रिया जारी है और अधिकारियों का प्रयास है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक कदम उठाए जा सके। वर्तमान में गिरफ्तार आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की जांच चल रही है और उनकी भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों तथा न्यायिक कार्यवाही की प्रक्रिया को आधार बनाकर होगा।





