नई दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच चल रहे विवाद के बाद जिला अदालतों में वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों के तबादले और लंबित शिकायतों की जांच निर्धारित निर्धारित समय अवधि में पूरी करने पर सहमति बनने के बाद वकीलों ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाने का फैसला वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की जिला अदालतों में कामकाज फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। विवाद के केंद्र में शाहदरा थाने में एक वकील पर कथित हमले के प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई और उसके बाद थाने में हुए घटनाक्रम के संबंध में उठे सवाल हैं।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के आदेश जारी किए। ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर के SDPO पद से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में भेजा गया, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को शाहदरा थाने से हटाकर दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में तैनात किया गया। वकील इन अधिकारियों के निलंबन और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। इसके बावजूद, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने तबादलों को नियमित प्रशासनिक कार्यवाही की प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। इसी कारण तबादले को अपने आप में किसी अधिकारी के खिलाफ इन आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
इस विवाद की शुरुआत कड़कड़डूमा कोर्ट के अधिवक्ता ललित बंसल पर कथित हमले के प्रकरण से हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्किंग के संबंध में हुए विवाद में ललित बंसल को गंभीर चोटें आई थीं। इसके पश्चात प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों के साथ किए गए व्यवहार के संबंध में वकीलों ने सवाल उठाए। वकीलों का आरोप था कि प्रकरण में कार्रवाई के संबंध में आश्वासन दिए जाने के बावजूद इससे जुड़े व्यक्तियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्हें कथित तौर पर छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम से नाराज कई अधिवक्ता 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने पहुंचे थे, जहां पुलिस अधिकारियों और वकीलों के बीच विवाद बढ़ गया।
वकीलों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, थाने में अपनी शिकायत और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में सवाल उठाने के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर अपना रिवॉल्वर दिखाया और वहां मौजूद अधिवक्ताओं को धमकाया। इस आरोप ने विवाद को और गंभीर बना दिया। इसके बावजूद, इस घटनाक्रम से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच से सामने आने वाले निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाकर ही हो सकेगी। दूसरी ओर, 26 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर कुछ वकीलों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई थी। इस तरह मामला पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों के साथ-साथ वकीलों के खिलाफ दर्ज प्रकरण की जांच से भी जुड़ गया।
विवाद के बढ़ने के बाद दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। वकीलों की मांग थी कि जुड़े हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। हड़ताल की वजह से जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ। कई मामलों की सुनवाई और निर्देशों पर असर पड़ने की जानकारी मिली। इससे उन लोगों को भी परेशानी हुई, जो अपने मुकदमों की सुनवाई, जमानत या अन्य कानूनी कार्यवाही के उद्देश्य से अदालत पहुंच रहे थे।
28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और विभिन्न जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। बैठक में दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादलों के साथ-साथ शिकायतों और दर्ज FIR की जांच के उद्देश्य से निर्धारित समय अवधि निर्धारित करने पर सहमति बनी। समन्वय समिति ने इसके पश्चात हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया और अधिवक्ताओं से तत्काल न्यायिक कार्य फिर से शुरू करने की अपील की। इस सहमति के अंतर्गत शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
समझौते में अन्य कानूनी मामलों की जांच के संबंध में भी निर्धारित समय अवधि तय की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शाहदरा थाने में दर्ज FIR नंबर 248/2026 में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के उद्देश्य से प्रभावी कदम उठाने पर सहमति बनी है। यदि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया जाता है, तो कानून के अनुसार गैर-जमानती वारंट (NBW) और लुकआउट सर्कुलर (LOC) जैसी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। दूसरी ओर, वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR नंबर 252/2026 की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का इस संबंध में निर्णय लिया गया है। इन निर्धारित समय अवधिओं का उद्देश्य दोनों पक्षों से जुड़े मामलों की जांच को आगे बढ़ाना और विवाद के समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
वकीलों की हड़ताल समाप्त होने के बाद अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों, अधिवक्ता पर कथित हमले और वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर नजर रहेगी। अधिकारियों के तबादले से अदालतों में कामकाज दोबारा शुरू करने का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन विवाद से जुड़े आरोपों का अंतिम समाधान जांच से सामने आने वाले निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच, जुड़े हुए पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। अब देखना होगा कि तय निर्धारित समय अवधि के भीतर जांच कितनी आगे बढ़ती है और पुलिस तथा बार एसोसिएशनों के बीच बनी सहमति को किस तरह लागू किया जाता है।





